बुधवार, 22 नवंबर, 2006 को 10:44 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भले ही संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन कोई कार्यवाही नहीं हुई पर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने संसद मार्ग पर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और रैली निकाली.
भारतीय जनता पार्टी ने इस शक्ति प्रदर्शन के साथ ही इसके भी संकेत दे दिए हैं कि वो संसद के इस सत्र के दौरान किन मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रही है.
इस मौके पर भाजपा संसद पर हमले के मामले में फाँसी की सज़ा पा चुके अफ़ज़ल गुरू को फाँसी के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना करने से नहीं चूकी.
पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भारी भीड़ वाली इस रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अफ़ज़ल की फाँसी की सज़ा से माफी पर सरकार का विचार करना चिंता का विषय है और अफ़सोस का भी.
इसके अलावा उन्होंने सच्चर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने के किसी भी प्रयास का जमकर विरोध करने का भी ऐलान किया.
दुविधा में सरकार
इस रैली को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के मसले पर वर्तमान सरकार का रुख साफ़ नहीं है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इस मसले पर दुविधा में है. कभी सरकार मुंबई बम धमाकों के बाद बातचीत बंद करती है तो कभी बातचीत फिर से शुरू कर देती है.
हालांकि वाजपेयी ने अफ़ज़ल और मुसलमानों को आरक्षण देने जैसे दोनों ही मुद्दों को अपने भाषण में नहीं छुआ.
भाजपा के नज़रिए से देखें तो इस रैली की उपलब्धि यही कही जा सकती है कि सत्ता से बाहर होने के बाद से पहली बार वो दिल्ली की सड़कों पर भारी भीड़ जुटाने में कामयाब रही.
साथ ही पार्टी ने ये संकेत देने में भी सफलता पाई कि वो अपनी आंतरिक कलह से उबर कर सरकार की नाकामियों को मुद्दा बनाने में लग रही है.