मंगलवार, 21 नवंबर, 2006 को 13:23 GMT तक के समाचार
चीन और भारत एक दूसरे के साथ आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं.
ये बयान चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच दिल्ली में मंगलवार को मुलाक़ात के बाद दिया गया.
मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देश 2010 तक व्यापार को दोगुना कर 40 अरब डॉलर तक ले जाने पर सहमत हुए हैं.
चीनी राष्ट्रपति चार दिन की भारत यात्रा पर हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा, "राष्ट्रपति हू जिंताओ के साथ मेरी बातचीत सौहाद्रपूर्ण, खुले और सकारात्मक माहौल में हुई. इमसें द्विपक्षीय रिश्ते बढ़ाने पर ज़ोर रहा."
इसके अलावा सीमा विवाद के मुद्दे पर भी बात हुई. चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने कहा कि बातचीत के दौरान सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कोशिशें तेज़ करने पर भी सहमति बनी है.
हू जिंताओ ने बताया कि क्षेत्रीय व्यापार समझौते की संभावनाओं के बारे में भी बातचीत तेज़ होगी.
दोनों नेताओं ने ये भी कहा है कि वे शांतिपूर्ण मकसदों के लिए परमाणु तकनीक के विकास के लिए संयुक्त रूप से काम करने पर विचार करेंगे.
भारत दौरा
चीनी राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है.
पिछले एक दशक में भारत आने वाले वे पहले चीनी राष्ट्रपति हैं. उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनो देशों के बीच आर्थिक और व्यापार संबंधों को और मज़बूत करना माना जा रहा है.
लेकिन कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि तेज़ी से बढ़ते आर्थिक रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के बीच पुराने राजनीतिक विवाद सुलझने के आसार नहीं है.
हू जिंताओ सत्ताधारी यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और लोकसभा के स्पीकर सोमनाथ चटर्जी और उप राष्ट्रपति भैंरों सिंह शेखावत से भी मिलेंगे.
वे युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मिलेंगे. बुधवार को राष्ट्रपति हू जिंताओ आगरा और मुंबई का दौरा करेंगे.
उधर तिब्बत के कुछ संगठन हू जिंताओ की भारत यात्रा का विरोध कर रहे हैं. इन लोगों ने सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया.
व्यापारिक-कूटनीतिक रिश्ते
1990 के दशक में जहाँ दोनों देशों के बीच मात्र 25 करोड़ डॉलर का व्यापार होता था, वहीं अगले साल तक ये बढ़कर लगभग 20 अरब डॉलर हो जाएगा.
हू जिंताओ की यात्रा से मात्र एक हफ़्ते पहले दोनो देशों के बीच अरूणाचल प्रदेश के मुद्दे पर विवाद छिड़ गया था.
भारत में चीन के राजदूत सुन यूशी ने दावा किया था -'जहाँ तक चीन के रुख का सवाल है केवल टावाँग का इलाक़ा ही नहीं, पूरा अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है - और उस पर हमारा हक़ है.'
उधर भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों से सवालों के जवाब में कहा था कि 'अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है.'
भारत और चीन के रिश्तों में 1962 के युद्ध के बाद भिन्न-भिन्न समय पर तनाव बढ़ता रहा है.
दोनो देशों के रिश्ते तब सुधरने शुरु हुए थे जब जून 2003 में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चीन की यात्रा की थी.
इसके बाद अप्रैल 2005 में भारत-चीन वार्ता तब आगे बढ़ी जब चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भारत यात्रा पर आए.
जुलाई 2006 में लगभग 44 साल के बाद नाथू ला दर्रा व्यापार के लिए खोल दिया गया. नाथू ला दर्रा भारत के सिक्किम और चीन के तिब्बत प्रांत को जोड़ता है.