सोमवार, 20 नवंबर, 2006 को 06:46 GMT तक के समाचार
नेपाली रेडियो और टेलीविज़न की रिपोर्टों के मुताबिक एक उच्च स्तरीय कमीशन की जाँच में कहा गया है कि इस साल नेपाल में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शनों को राजा ज्ञानेंद्र ने दबाने की कोशिश की थी.
बीबीसी संवाददाता सुशील कुमार का कहना है कि रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी अभी नहीं दी गई है
लेकिन सोमवार को नेपाली प्रधानमंत्री को रिपोर्ट सौंपने के बाद कमीशन के एक वरिष्ठ सदस्य हरिहर बिराही ने इस बात की पुष्टि की है कि राजा को लोगों पर ज़्यादती करने का ज़िम्मेवार ठहराया गया है.
सुरक्षाबलों की कार्रवाई के चलते इस साल अप्रैल में कम से कम 21 लोग मारे गए थे और हज़ारों लोग घायल हो गए थे.
अप्रैल में राजा ज्ञानेंद्र नेपाली कैबिनट के मुखिया थे. रिपोर्टों के मुताबिक कमीशन ने उस समय के पूरे कैबिनेट और कई अन्य लोगों का भी जाँच में नाम लिया है.
'राजा ज़िम्मेदार'
कमीशन का गठन प्रदर्शनों के दौरान लोगों पर हुई कार्रवाई की जाँच के लिए किया गया था.जाँच के दौरान कमिश्न ने राजा ज्ञानेंद्र को सवालों की एक सूची सौंपी थी लेकिन उन्होंने इन सवालों का जवाब नहीं दिया.
हरिहर बिराही ने बीबीसी को बताया कि शाही सरकार के कई मंत्रियों और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों समेत करीब 200 लोगों को दोषी ठहराया गया है.
उन्होंने बताया कि राजा ज्ञानेंद्र को सरकार का मुखिया होने के नाते दोषी ठहराया गया है.
कमीशन ने हालांकि किसी तरह की सज़ा की बात नहीं कही है क्योंकि मौजूदा संविधान में इसका प्रावधान नहीं है.
कमीशन ने कहा है कि इस मकसद के लिए नया अंतरिम का़नून बनाया जाए.
इससे पहले नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार किसी को भी नहीं बख़्शेगी लेकिन अंतिम फ़ैसला रिपोर्ट को पढ़ने के बाद ही लिया जाएगा.
सज़ा का प्रावधान नहीं
मतभेदों के चलते पैनल के पाँच में से दो सदस्यों ने अंतिम रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए.
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज कृष्ण जंग इस पैनल के अध्यक्ष थे. पैनल ने मंत्रियों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों समेत करीब 300 लोगों से पूछताछ की थी.
अप्रैल में हुए प्रदर्शनों के बाद नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र की सत्ता पर सीधी पकड़ ख़त्म हो गई थी और बहुदलीय सरकार का गठन किया गया था.
उसके बाद राजा से सेना पर नियंत्रण का अधिकार भी वापस ले लिया गया था. तब से लोग राजशाही को ख़त्म करने की माँग करते रहे हैं.
अगले साल नेपाल में संविधान सभा के लिए चुनाव होगा. ये सभा राजशाही के भविष्य पर फ़ैसला करेगी.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस जाँच में राजा का नाम आने से उनकी स्थिति और कमज़ोर हो जाएगी.