शनिवार, 18 नवंबर, 2006 को 11:22 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
नेपाल के माओवादी नेता प्रचंड ने उम्मीद जताई है कि मंगलवार को माओवादियों और नेपाल सरकार के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएँगे.
उन्होंने नेपाल में संविधान-सभा के साफ़-सुथरे चुनावों के लिए भारत से नैतिक समर्थन मांगा है. प्रचंड हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के लीडरशिप समिट में भाग लेने भारत आए हुए हैं.
इस सम्मेलन में अपने भाषण के बाद संवाददाता सम्मेलन में प्रचंड ने उम्मीद ज़ाहिर की कि माओवादियों और नेपाल सरकार के बीच शांति समझौते पर 21 नवंबर को हस्ताक्षर हो जाएँगे.
माओवादी नेता का कहना था कि नेपाल को लेकर भारत सरकार का रवैया बदला है और उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच के मुद्दे आसानी से सुलझ जाएँगें.
'सैद्धांतिक रिश्ते'
भारत के माओवादियों को समर्थन के मुद्दे पर प्रचंड ने कहा कि भारत के माओवादियों के साथ उनके सैद्धांतिक रिश्ते हैं, लेकिन नेपाल और भारत के माओवादियों ने कभी मिलकर काम नहीं किया.
नेपाल में लोकतांत्रिक प्रकिया शुरू करने में मदद के लिए उन्होंने भारत के राजनैतिक दलों ख़ासतौर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सराहना की.
लेकिन प्रचंड ने स्पष्ट किया कि उन्हें नेपाल में "राजा" की भूमिका किसी भी रूप में स्वीकार नहीं है.
माओवादियों के हथियार छोड़ने के मामले पर प्रचंड का कहना था कि ये पूरी प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में होगी इसलिए इस मुद्दे पर किसी को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
माओवादी नेता ने यह भी कहा कि नेपाल की शाही सेना में योजनाबद्ध तरीक़े से कटौती की जाएगी.