बुधवार, 15 नवंबर, 2006 को 17:09 GMT तक के समाचार
भारत और पाकिस्तान आतंकवाद का मुक़ाबला करने के लिए मिलकर क़दम उठाने पर सहमत हुए हैं और इसके लिए ख़ुफ़िया जानकारी का आदान-प्रदान करने पर भी सहमति हुई है.
दोनों देशों के विदेश सचिवों की दो दिन की बातचीत में यह फ़ैसला किया गया है और इस बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया और बातचीत को कुछ महीने पहले हवाना में जारी किए गए संयुक्त बयान की भावना के अनुरूप बताया गया है.
इस बयान में कहा गया है कि व्यापक शांति प्रक्रिया के इस तीसरे दौर में शांति और सुरक्षा, आपसी विश्वास बढ़ाने वाले क़दमों, जम्मू कश्मीर, सियाचिन, सर क्रीक, आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी, आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में दोस्ताना माहौल को बढ़ावा देने वाले उपायों पर विचार किया गया.
बातचीत को दोस्ताना और सकारात्मक माहौल में संपन्न बताया गया है.
बुधवार को समाप्त हुई बातचीत में फ़ैसला किया गया कि ख़ुफ़िया जानकारियों का आदान-प्रदान करने के लिए तीन सदस्यों वाला एक पैनल बनाया जाएगा.
दोनों देशों के बीच चल रही शांति प्रक्रिया गत जुलाई में मुंबई बम धमाकों के बाद स्थगित कर दी गई थी जिसके बाद यह सचिव स्तर की पहली बातचीत थी.
दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने के लिए आतंकवाद निरोधक उपायों पर ख़ास ज़ोर था.
भारत में मुंबई बम धमाकों के लिए पाकिस्तान और उसकी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई को ज़िम्मेदार ठहराया था.
पाकिस्तानी विदेश सचिव रियाज़ मोहम्मद ख़ान ने बातचीत के बाद कहा कि उनका देश भी आतंकवादी गतिविधियों से उतना ही सताया हुआ है जितना कि भारत और मुंबई बम धमाकों के 15 मिनट के भीतर जिस तरह से पाकिस्तान की तरफ़ उंगली उठा दी गई थी वह तार्किक नहीं लगता.
उन्होंने कहा कि दोनों देशों में सहमति हुई है कि आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए ख़ुफ़िया जानकारी का आदान-प्रदान किया जाएगा और इसक लिए तीन सदस्यों का एक पैनल बनाया जाएगा.
रियाज़ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि दोनों देशों में इस बात पर भी सहमति हुई है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में परमाणु टकराव रोकने के लिए उपाय किए जाएंगे.
ख़बरों के अनुसार विदेश सचिव स्तर की इस बातचीत में कश्मीर विवाद, सर क्रीक विवाद और सियाचिन मुद्दों पर भी चर्चा हुई है.
सर क्रीक विवाद के बारे में सहमति हुई है कि आगामी फ़रवरी तक उस क्षेत्र का सर्वे वग़ैरा करके नक्शा तैयार कर लिया जाएगा.
दोनों पक्षों ने इस पूरी बातचीत को सकारात्मक बताया है. दोनों विदेश सचिव फ़रवरी 2007 में इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत के लिए मिलने पर सहमत हुए हैं.
पहला दिन
बातचीत के पहले दिन मंगलवार को पाकिस्तान के विदेश सचिव रियाज़ मोहम्मद ख़ान और भारतीय विदेश सचिव शिव शंकर मैनन ने 'आतंकवाद' और कश्मीर पर विस्तार से चर्चा की थी.
चरमपंथ से निपटने के लिए संयुक्त प्रणाली विकसित करने के मुद्दे पर भी दोनो पक्षों ने विस्तृत विचार-विमर्श किया था.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज़ सरना ने पहले दिन की बातचीत के बारे में कहा था कि 'आतंकवाद' के मुद्दे पर हवाना में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के घोषणापत्र के बाद उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा हुई.
उनका कहना था, "आतंकवाद निरोधक प्रणाली का जो प्रस्ताव दिया गया है उस पर चर्चा हुई.. जम्मू कश्मीर का मुद्दा था. 'कम्पोज़िट डॉयलॉग' प्रक्रिया के सभी मुद्दों पर बात हुई है."
अन्य मुद्दे
दोनों पक्षों ने नागरिकों की आवाजाही, मछुआरों की समस्याओं और आर्थिक और व्यावसायिक रिश्तों की भी बात की थी.
सरना ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने वाले विभिन्न मुद्दों पर भी बातचीत हुई जैसे दोनों देशों की जेलों में बंद आम नागरिकों की स्थिति, मछुआरों की अदला-बदली इत्यादि.
सरना का कहना था कि दोनों पक्षों ने आर्थिक हितों के मसलों पर भी विचारों का आदान प्रदान किया.
पाकिस्तान के विदेश सचिव रियाज़ मोहम्मद ख़ान और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी से भी मुलाक़ात की.
ये दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की चौथे चरण की बातचीत है.