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रविवार, 12 नवंबर, 2006 को 19:24 GMT तक के समाचार

'अफ़ग़ानिस्तान में चार गुना ज़्यादा मौतें'

एक रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में इस साल मरनेवालों की संख्या में चार गुना वृद्धि हुई है.

इसमें कहा गया है कि इस साल अब तक 3700 लोगों को मौत हो चुकी है जिसमें लगभग एक हज़ार आम नागरिक शामिल हैं.

यह अध्ययन संयुक्त समन्वय और पर्यवेक्षक बोर्ड ने किया जिसमें अफ़ग़ानिस्तान की सरकार, समर्थक विदेशी सरकारों और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि शामिल थे.

दूसरी ओर अफ़ग़ान अधिकारियों का कहना है कि नैटो और अफ़ग़ान सेना ने पाकिस्तान की सीमा के नज़दीक चलाए एक अभियान में लगभग 60 तालेबान लड़ाकों को मार दिया है.

अफ़ग़ानिस्तान के पक्तिया प्रांत में छह दिन चला यह अभियान रविवार को समाप्त हुआ.

चुनौतियाँ

इधर संयुक्त राष्ट्र के एक प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि तालेबान की सत्ता के पतन के पाँच साल बाद भी अफ़ग़ानी नेताओं के सामने बड़ी चुनौतियाँ हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में मरनेवालों की संख्या की सही जानकारी देना कठिन है क्योंकि अनेक लोग हवाई हमलों में निशाना बनते हैं.

हालांकि ज़्यादातर मारे गए लोग विद्रोही नज़र आते हैं लेकिन इनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल के लोग शामिल हैं.

बिगड़ती सुरक्षा स्थिति ने वहाँ विकास के कार्य में बाधा डाली है और अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण हिस्से में स्कूल बंद हो गए हैं.

रिपोर्ट में भष्ट्राचार को भी एक समस्या बताया है और अफ़ग़ान लोगों के जुड़ाव न होने से चरमपंथियों से लड़ने में मुश्किलें आ रही हैं.

इधर सुरक्षा परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल वहाँ का दौरा कर रहा है.

इस प्रतिनिधिमंडल के नेता और जापानी राजदूत केंज़ो ओशिमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सबसे बड़ी चुनौती तालेबान से लड़ने से की है.

इसके अलावा अफीम उत्पादन भी बड़ी समस्या है क्योंकि यह हिंसा को बढ़ावा दे रहा है.