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शुक्रवार, 10 नवंबर, 2006 को 13:39 GMT तक के समाचार

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता

विद्रोही संगठनों पर पाबंदी की मियाद बढ़ी

भारत सरकार ने देश के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय चार अलगाववादी संगठनों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध दो साल के लिए बढ़ा दिया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से यह आदेश जारी हुआ है.

जिन अलगाववादी संगठनों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध दो साल और बढ़ाया गया है, वे हैं- यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (एनडीएफ़बी), अचिक नेशनल वोलेन्टिय काउंसिल (एएनवीसी) और एचएनएलसी.

उल्फ़ा और एनडीएफ़बी असम में और अन्य दो संगठन मेघालय में सक्रिय हैं. इन चार संगठनों में से तीन का भारत सरकार के साथ संघर्षविराम समझौता है. सिर्फ़ उल्फ़ा का ही केंद्र सरकार के साथ संघर्षविराम नहीं है.

पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा मामलों के जानकार जयदीप सैकिया का कहना है कि पाबंदी बढाए जाने का मतलब ये है कि सरकार इन संगठनों के साथ बातचीत को लेकर ख़ुश नहीं.

बातचीत

ये चार संगठन उन चौतीस अलगाववादी संगठनों में शामिल हैं, जिन्हें केंद्र सरकार 'आतंकवादी' कहती है.

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें उल्फ़ा के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू करने को लेकर शंका है.

अधिकारियों का कहना है कि सरकार उल्फ़ा से सीधे बात करना चाहती है. इससे पहले पीपुल्स कंसल्टेटिव ग्रुप (पीसीजी) के माध्यम से बातचीत हुई थी.

पीसीजी की दो सदस्य इंदिरा गोस्वामी और रेवती फूकन सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मिलने जा रही हैं. वे उल्फ़ा के साथ फिर से बातचीत शुरू करने की अपील करेंगी.