शुक्रवार, 10 नवंबर, 2006 को 17:53 GMT तक के समाचार
ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर में एक दलित परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले की जाँच फास्ट ट्रैक कोर्ट से कराने का फ़ैसला किया है.
पुलिस का मानना है कि हत्या के पीछे ऊंची जाति के लोगों का हाथ है. घटना के विरोध में शुक्रवार को नागपुर बंद रहा.
कुछ लोगों ने लगभग एक महीना पहले दलित किसान भैया लाल की पत्नी और उनके तीन बच्चों की गला काट कर निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी.
राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को तुरंत न्याय दिलाने और वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है.
इसके बावजूद दलितों का कहना है कि उनके जीवन और प्रतिष्ठा की रक्षा करने में सरकार विफ़ल रही है.
राजनीतिक रंग
स्थानीय अख़बार के संपादक प्रकाश दुबे कहते हैं कि नगरपालिका चुनाव नज़दीक है और इस घटना ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है.
वो कहते हैं कि राजनीतिक दल अब सरकार पर पिछड़ी जातियों के साथ भेदभाव ख़त्म करने में विफ़ल रहने का आरोप लगा रहे हैं और ये आरोप एक हद तक सही भी हैं.
लेकिन राजनीति से दूर कपास की खेती के लिए चर्चित विदर्भ के लोगों में इस हत्याकांड को लेकर काफी गुस्सा है.
प्रकाश दुबे कहते हैं कि ये निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि दलित परिवार के सदस्यों की हत्या जातिगत दुश्मनी का नतीजा है क्योंकि भैया लाल का शायद गाँव के कुछ लोगों के साथ जमीन का झगड़ा चल रहा है.
खुद भैया लाल कहते हैं कि वो 17 वर्ष पहले इस गाँव में आए थे लेकिन स्थानीय अधिकारियों या पंचायत ने उनका कभी भी पंजीकरण नहीं किया.
भैया लाल का आरोप है कि नीची जाति का होने कारण उनके साथ इस तरह का वर्ताव किया गया.
विदर्भ की कुल आबादी में दलितों का हिस्सा 20 फ़ीसदी से भी अधिक है लेकिन वो अभी तक आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बन पाए हैं.