शुक्रवार, 10 नवंबर, 2006 को 15:56 GMT तक के समाचार
सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अमरीका के दक्षिण-एशिया मामलों के विदेश उपमंत्री रिचर्ड बाउचर ने उम्मीद जताई है कि कांग्रेस के अगले सत्र में भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौते को मंज़ूरी मिल जाएगी.
यह सत्र सोमवार से शुरु हो रहा है और इस हफ्ते चुनावों में डेमोक्रेट पार्टी को मिली जीत के बाद इस समझौते को लेकर शंकाएं व्यक्त की जा रही थीं.
बाउचर इस समय भारत के दौरे पर हैं जहां उन्होंने विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से मुलाक़ात की और परमाणु समझौते के अलावा आतंकवाद के मुद्दे पर भी बात की.
भारत और अमरीका के बीच मार्च महीने में हुए परमाणु समझौते पर कई अमरीकी सांसदों की आपत्तियों के बाद इस हफ्ते चुनावों में डेमोक्रेट पार्टी की जीत ने इस समझौते की मंज़ूरी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने बार-बार कहा है कि इस समझौते को मंज़ूरी दिलाना उनके लिए बहुत ज़रुरी है. दक्षिण एशिया मामलों के विदेश उपमंत्री ने भी दिल्ली में न केवल राष्ट्रपति के आश्वासन को दोहराया बल्कि पूरी उम्मीद जताई की समझौते को मंज़ूरी मिल जाएगी.
उन्होंने कहा, "इस समझौते को बहुत समर्थन मिला है. न केवल रिपब्लिकन बल्कि डेमोक्रेट सांसद भी इसके पक्ष में हैं और उन्होंने ये बात कही भी है. मुझे पूरी उम्मीद है. अब सदन में क्या होगा ये अभी बताया नहीं जा सकता लेकिन जिस तरह का समर्थन इस समझौते को है उससे इसके पारित होने की प्रबल संभावना है."
अगर परमाणु समझौते को मंज़ूरी मिल जाती है तो इसे भारत और अमरीका के संबंधों में मील का पत्थर माना जा सकता है जिसके तहत भारत को परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना ही शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु प्रौद्योगिक मिल सकेगी बदले में भारत अपने कुछ परमाणु रिएक्टरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच के लिए उपलब्ध कराएगा.
बाउचर ने दिन में भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से भी मुलाक़ात की जिस दौरान न केवल परमाणु समझौते बल्कि आतंकवाद के मुद्दे पर भी चर्चा हुई.
बाउचर ने भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद संबंधी साझा प्रयासों पर भी टिप्पणी की, "आतंकवाद के मुद्दे पर बात करना, एक मेकेनिज्म बनाना अच्छा क़दम है. भारत के सामने आतंकवाद की जो चुनौतियां हैं अमरीका भी उसका सामना कर रहा है. यहां तक कि पाकिस्तान भी. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने साफ कहा है कि वो अपने देश को लोकतांत्रिक रास्ते पर ले जाना चाहते हैं. हम दोनों देशों के विदेस सचिवों के बीच होने वाली वार्ता से भी उम्मीद रखते हैं."
जानकारों का मानना है कि बाउचर की यात्रा का समय महत्वपूर्ण है और वो इस समय शायद यह संकेत देना चाहते हैं कि सीनेट में डेमोक्रेट पार्टी का बहुमत आने के बाद भी इस क्षेत्र के लिए रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की नीतियों में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आएगा.