गुरुवार, 09 नवंबर, 2006 को 12:09 GMT तक के समाचार
असित जौली
बीबीसी संवाददाता, चंडीगढ़
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने बेशक़ीमती कोहिनूर हीरे को भारत वापस लाने की मांग की है.
इस समय कोहिनूर हीरा ब्रिटिश क्राउन के रत्नों का हिस्सा है. एक प्रस्ताव पारित करते हुए एसजीपीसी की कार्यकारी समिति ने कहा कि ब्रिटिश संग्रहालय में सिख विरासत से जुड़े कोहिनूर हीरे समेत सभी रत्न और आभूषण भारत वापस लाए जाएँ.
आज़ादी से पहले ही ये सभी रत्नाभूषण इंग्लैंड ले जाए गए थे. एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने एक प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि इन सभी अमूल्य रत्नों को अमृतसर के सिख संग्रहालय में रखा जाए.
प्रस्ताव में कहा गया है कि कोहिनूर के साथ-साथ सोने का सिंहासन, महाराजा रणजीत सिंह की पताका और गुरु गोविंद सिंह की कलगी तुरंत भारत आनी चाहिए.
अंग्रेज़ों से लोहा लेने वाले महाराजा रणजीत सिंह अंतिम सिख शासक थे.
कोशिश
इससे पहले भी इन रत्नाभूषणों को भारत लाने की मांग उठ चुकी है. एसजीपीसी अध्यक्ष मक्कड़ का कहना है कि ये मांगें इतनी गंभीरता से कभी पहले नहीं उठाई गई.
मक्क्ड़ ने कहा," हर धार्मिक समुदाय को अपनी विरासत सहेज कर रखने का अधिकार है और हम इसे सहेजने की पूरी कोशिश करेंगे."
एसजीपीसी के इस प्रस्ताव को ज़ल्द ही प्रधानमंत्री के पास भेज दिया जाएगा जिससे ब्रिटिश सरकार पर इन्हें लौटाने का दबाव बनाया जा सके.
एसजीपीसी ने आशा जताई कि प्रधानमंत्री इस मामले में ख़ास रुचि लेगें क्योंकि वो ख़ुद एक सिख हैं.
मक्कड़ के विरोधी सिख नेताओं का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिख समुदाय कई समस्याओं से परेशान है ऐसे समय में ये मुद्दे उठाना समय की बर्बादी है.
एसजीपीसी के पूर्व महासचिव मंजित सिंह कलकत्ता ने कहा कि इन नेताओं ने फ़्रांस में सिखों की पगड़ी पर रोक लगाए जाने की समस्या को उठाने में कोई ख़ास रुचि नहीं दिखाई.
मंजित सिंह ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में कोई असल राजनैतिक एजेंडा न होने की वज़ह से मक्कड़ की पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने जानबूझ कर कोहिनूर का मुद्दा उछाला है.