सोमवार, 06 नवंबर, 2006 को 20:18 GMT तक के समाचार
नेपाल में प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला और माओवादी नेता पुष्प कुमार दहल उर्फ़ प्रचंड के बीच छह घंटे की वार्ता के बाद कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है लेकिन संकेत मिले हैं कि माओवादी हथियार छोड़ने को तैयार हो गए हैं.
वार्ता फ़िलहाल रात भर के लिए स्थगित कर दी गई है.
इस शांति वार्ता का मक़सद एक दशक पुरानी माओवादी समस्या का हल निकालकर ठोस शांति समझौते पर पहुँचना है.
इस विवाद के चलते पिछले एक दशक में हिंसा में तेरह हज़ार से ज़्यादा लोगों की जानें गई हैं.
इससे पहले भी दोनो नेताओं के बीच चार दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कई असहमतियों के बाद वार्ता पिछले माह स्थगित हो गई थी.
हथियारों की निगरानी
दोनों पक्षों के बीच माओवादियों के हथियारों का प्रबंधन कैसे हो, इस पर सहमति नहीं बन पाई थी.
माओवादियों का दावा है कि उनके हथियारबंद सदस्यों की संख्या लगभग 35 हज़ार है.
सोमवार को हुई वार्ता के बाद ख़बरें मिली हैं कि माओवादी पहली बार हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं.
ख़बरें हैं कि अगले साल चुनाव के पहले माओवादी अपने हथियार सात कैंपों में रख देंगे.
हालांकि इन हथियारों की चाबी माओवादियों के पास ही रहेगी लेकिन इन तालों पर संयुक्त राष्ट्र की नज़र रहेगी और समझौते का कोई भी उल्लंघन होने पर वे इसकी सूचना देंगे.
प्रचंड ने कहा है कि सेना के हथियारों की निगरानी के लिए भी समान व्यवस्था की जानी चाहिए.
इस समझौते की घोषणा करने से पहले दोनों पत्र अन्य मुद्दों को भी सुलझा लेना चाहते हैं.
इन मुद्दों में राजशाही का भविष्य भी है. लेकिन माना जा रहा है कि माओवादी इस बात के लिए भी सहमत हो गए हैं कि इसका फ़ैसला संविधान सभा करे जिसके चुनाव अगले साल होने है.
इसके अलावा अंतरिम सरकार के गठन पर भी बात होनी है. उल्लेखनीय है कि इस अंतरिम सरकार में माओवादियों को भी शामिल किया जाना है.