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सोमवार, 06 नवंबर, 2006 को 11:14 GMT तक के समाचार

शांति वार्ता से ठोस समझौते की उम्मीद

नेपाल में हो रही शांति वार्ता का मक़सद एक दशक पुरानी माओवादी समस्या का हल निकालकर ठोस शांति समझौते पर पहुँचना है.

माओवादी नेता पुष्प कुमार दहल उर्फ़ प्रचंड ने कहा है कि प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के साथ उनकी सोमवार को होने वाली मुलाक़ात में अहम सफ़लता मिल सकती है.

बैठक में सरकार में शामिल सात दलों के शीर्ष नेता भी शिरकत करेंगे.

प्रमुख मुद्दों पर टकराव के चलते दोनो नेताओं के बीच शांति वार्ता चार दौर की बातचीत के बाद पिछले माह स्थगित हो गई थी.

प्रचंड ने कहा कि पिछले कुछ हफ़्तों में कोइराला के साथ हुई उनकी अनौपचारिक बातचीत में कई मुद्दों पर सहमति बनी है.

सरकार के प्रमुख मध्यस्थ कृष्ण प्रसाद सितौला ने भी प्रचंड के सुर में सुर मिलाते हुए उम्मीद जताई है कि बातचीत का ठोस नतीजा निकल सकेगा.

हथियारों पर समझौता

हथियारों के प्रबंधन और राजशाही के भविष्य को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद हैं.

कहा जा रहा है कि दोनो पक्षों के बीच हथियारों के प्रबंधन पर सहमति बन गई है. हथियार सौंपने की यह प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र या क्लोज सर्किट कैमरों की निगरानी में पूरी की जाएगी.

दोनो पक्षों के आग्रह पर संयुक्त राष्ट्र का दल पहले ही नेपाल पहुँच चुका है.

माओवादियों का दावा है कि उनके हथियारबंद सदस्यों की संख्या लगभग 35 हज़ार है.

प्रचंड ने कहा है कि सेना के हथियारों की निगरानी के लिए भी समान व्यवस्था की जानी चाहिए.

अंतरिम सरकार

बताया जा रहा है कि कोइराला और प्रचंड इस बात पर भी सहमत हो गए हैं कि राजशाही के भविष्य का फ़ैसला संविधान सभा की पहली बैठक में किया जाएगा.

संविधान सभा के लिए चुनाव अगले साल जून माह से पहले कराने की योजना है.

उम्मीद है कि दोनो पक्ष अंतरिम संविधान और अंतरिम संसद के लिए समझौते की भी घोषणा करेंगे ताकि अंतरिम सरकार में माओवादी विद्रोहियों को शामिल करने का रास्ता साफ़ हो जाए.

नेपाल में नरेश ज्ञानेन्द्र के सत्ता छोड़ने और सरकार की कमान सात दलों के गठबंधन को सौंपने के बाद माओवादियों के साथ शांति वार्ता शुरू हुई थी.