रविवार, 05 नवंबर, 2006 को 18:32 GMT तक के समाचार
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा सुनाए जाने पर भारत सरकार ने सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया दी है.
लगभग ऐसी ही प्रतिक्रिया सत्ताधारी गठबंधन यूपीए के प्रमुख घटक कांग्रेस पार्टी ने भी दी है.
वहीं सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने इसका ज़ोरदार विरोध करते हुए कहा है कि भारत सरकार को भी इसकी निंदा करनी चाहिए.
उल्लेखनीय है कि रविवार को इराक़ की एक अदालत ने 1982 के दुजैल नरसंहार मामले में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा सुनाई है.
इस फ़ैसले पर भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बहुत सतर्कता के साथ प्रतिक्रिया जारी की है.
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "हमनें पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को को मौत की सज़ा सुनाए जाने की ख़बरें देखी हैं. हमारी समझ से इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील का प्रावधान है."
"जीवन और मौत के फ़ैसले के लिए एक विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें फ़ैसला जीतने वाले के पक्ष में हुआ नहीं दिखना चाहिए और यह इराक़ की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य होना चाहिए."
भारत सरकार के बयान में कहा गया है, "हम हमेशा से ही इराक़ समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में रहे हैं और हमें उम्मीद है कि इस फ़ैसले से इराक़ के लोगों की परेशानी और नहीं बढ़ेंगी."
कम्युनिस्टों का विरोध
इस फ़ैसले की निंदा करते हुए सीपीएम ने यूपीए सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है.
सीपीएम पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सद्दाम हुसैन पर झूठा मुक़दमा चलाने के बाद ग़लत ढंग से मौत की सज़ा सुनाई गई है.
पार्टी ने कहा है कि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील की हत्या कर दी गई और दो बार न्यायाधीश बदल दिया गया.
बयान में कहा गया है कि यूपीए सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि मौत की सज़ा पर पुनर्विचार किया जा सके.
पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने इस फ़ैसले को 'न्यायिक हत्या' कहा है.
उधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा है कि यह न्यायालय का फ़ैसला नहीं बल्कि अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का फ़ैसला है.
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
यूपीए के मुख्य घटक दल कांग्रेस ने एहतियात के साथ प्रतिक्रिया दी है जो बहुत कुछ भारत सरकार की प्रतिक्रिया से मिलती जुलती है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "हम उम्मीद और विश्वास करते हैं कि जीवन और मौत का फ़ैसला विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया से होगा और इससे इराक़ जनता संतुष्ट होगी."
कांग्रेस ने भी उम्मीद ज़ाहिर की है कि इस फ़ैसले से इराक़ में लोकतंत्र की बहाली की प्रक्रिया पर विपरीत असर नहीं पड़ेगा.