रविवार, 05 नवंबर, 2006 को 23:37 GMT तक के समाचार
नगेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत प्रशासित राज्य जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि जो लोग प्रधानमंत्री के गोलमेज़ सम्मेलन में शामिल नहीं हो रहे हैं वे घाटी में शांति के ख़िलाफ़ हैं.
उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या कै हल के लिए कोई अलादीन का चिराग़ नहीं है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जो शांतिवार्ता शुरु की है, उसमें भाग न लेने के लिए उन्होंने अलगाववादियों को आड़े हाथों लिया है.
'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी व्यक्तियों और संगठनों और गुटों से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री के साथ वार्ता में ज़रुर शामिल हों.
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में सीमा पर से घुसपैठ में बढ़ोत्तरी के बावजूद हिंसा की घटनाओं में कमी आई है.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "यहाँ तक कि पाकिस्तान ने भी कहा है कि इस जटिल मामले को सुलझाने का एकमात्र रास्ता बातचीत है."
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ तक ने कहा है कि कश्मीर के लोगों को बैठकर बात करते रहना चाहिए लेकिन अगर कोई बात करने नहीं आना चाहता तो हम क्या करें."
'अलग है जम्मू-कश्मीर'
कश्मीर समस्या के हल के लिए पिछले एक साल में कोई राजनीतिक पहल न करने के आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा, "कश्मीर समस्या को रातों-रात सुलझाने के लिए अलादीन का कोई चिराग नहीं है."
उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर दूसरे राज्यों जैसा नहीं है जहाँ प्रशासन को राज्य के लोगों को ही संभालना होता है, यहाँ को पाकिस्तान, उसकी सेना, घुसपैठियों और आतंकवादियों सबसे निपटना पड़ता है."
ग़ुलाम नबी आज़ाद ने उम्मीद जताई कि इस महीने दिल्ली में होने वाली भारत-पाकिस्तान की सचिव स्तर की बैठक में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.