गुरुवार, 02 नवंबर, 2006 को 00:30 GMT तक के समाचार
नेपाल में जीती जागती देवी या कुमारी की पूजा प्रथा की जाँच के आदेश दिए गए हैं.
नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने ये आदेश जारी किया है. जाँच से यह पता लगाया जाएगा कि पूजा की आड़ में लड़कियों का शोषण तो नहीं होता.
नेपाल में किसी लड़की को देवी मान कर पूजा करने की प्रथा सदियों से चली आ रही है.
हाल ही में कुछ संगठनों ने इस प्रथा को ख़त्म किए जाने के लिए अदालत में अर्जी दी थी.
इन संगठनों का कहना है कि यह प्रथा मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है.
इस मामले में अंतिम फ़ैसला तीन महीने के बाद जाँच रिपोर्ट मिलने पर सुनाया जाएगा.
शोषण
याचिकाकर्ता के वकील टीकाराम भट्टाराई ने बीबीसी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की समिति इस बात का पता लगाएगी कि पूजा प्रथा की आड़ में लड़कियों का शोषण तो नहीं हो रहा है.
उन्होंने कहा, "यह एक ऐतिहासिक आदेश है क्योंकि इससे कुमारी प्रथा के आधुनिकीकरण का रास्ता साफ़ होना चाहिए."
देवी का चयन पाँच से छह साल की लड़कियों के बीच से होता है लेकिन 12 या 13 साल की उम्र में मासिक धर्म शुरू होने के बाद चुनी गई लड़की देवी रहने के अयोग्य हो जाती है.
काठमांडू के आस पास रहने वाले नेवारी समुदाय का कहना है कि वो सिर्फ़ पुरातन हिंदू प्रथा का पालन कर रहे हैं.
कुमारी या देवी को तलेजू भवानी मंदिर में रखा जाता है लेकिन वो सामान्य जनजीवन से दूर रहती है और स्कूल भी नहीं जा सकती.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इससे लड़की मनोवैज्ञानिक रुप से कमजोर हो जाती है.