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मंगलवार, 31 अक्तूबर, 2006 को 18:22 GMT तक के समाचार

'अफ़ज़ल को माफ़ी की माँग नहीं की'

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि उन्होंने संसद के हमले में दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल की फाँसी की सज़ा माफ़ करने को कहा था.

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी तौर पर वो फाँसी के बजाए क़ैद की सज़ा देने के पक्ष में हैं.

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि अफ़ज़ल को फाँसी की सज़ा के मामले में उन्हें ग़लत उद्धृत किया गया.

उनका कहना है कि उनका बयान छापनेवाले समाचार माध्यमों में से किसी ने भी उनसे बात नहीं की.

ग़ौरतलब है कि मीडिया में ऐसी ख़बरें आईं थीं कि मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अनुरोध किया है कि वो राष्ट्रपति से मोहम्मद अफ़ज़ल को माफ़ी दिलवाने में मदद करें.

प्रधानमंत्री से अपनी बातचीत के बारे में उनका कहना था कि जब चंडीगढ़ में उनकी मुलाक़ात हुई थी तो उन्होंने इस मामले की जानकारी प्रधानमंत्री को दी थी.

आज़ाद का कहना था कि उन्होंने मीडिया से कहा था, '' मैंने प्रधानमंत्री को कश्मीर में अफ़ज़ल की फाँसी के विरोध में चल रहे आंदोलन के बारे में जानकारी दी. लेकिन मीडिया ने इसका मतलब यह निकाला कि मैंने माफ़ी देने को कहा है.''

हालांकि उन्होंने इस मसले पर अपना रुख़ साफ़ करने से इनकार कर दिया.

उनका कहना था,'' मेरा काम प्रशासन चलाना है न कि 24 घंटे का टीवी चैनल. इसलिए मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा.''

माफ़ी पर बहस

दरअसल इन दिनों कांग्रेस में अफ़ज़ल को फाँसी दिए जाने के सवाल पर भारी बहस चल रही है.

एक पक्ष का कहना है कि फाँसी न दिए जाने से भाजपा को लाभ मिलेगा जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि फाँसी देने से मुसलमानों और भारत प्रशासित कश्मीर में ग़लत संदेश जाएगा.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सन् 2001 में संसद पर हुए हमले के मामले में अफ़ज़ल को मौत की सज़ा सुनाई थी.

इसके बाद उनके परिवार ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से माफ़ी की अपील की थी जिस पर विचार चल रहा है.

फाँसी दिए जाने का विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि अफ़ज़ल का मुकदमा न्यायोचित ढंग से नहीं चला.

लेकिन दक्षिणपंथी गुट और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी कह रही है कि अफ़ज़ल को जल्द फाँसी दी जाए.