http://www.bbcchindi.com

सोमवार, 30 अक्तूबर, 2006 को 11:16 GMT तक के समाचार

प्रियदर्शिनी के हत्यारे को मौत की सज़ा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड में दोषी पाए गए संतोष कुमार सिंह को मौत की सज़ा सुनाई है.

खचाखच भरी अदालत में न्यायाधीश आरएस सोढ़ी और न्यायाधीश पीके भसीन ने फ़ैसला दिया कि अभियुक्त सिर्फ और सिर्फ मौत की सज़ा का हकदार है और उसे फाँसी पर लटका दिया जाए.

प्रियदर्शिनी मट्टू की वर्ष 1996 में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. उस समय प्रियदर्शिनी की उम्र 23 साल थी और वह कानून की पढ़ाई कर रही थीं.

हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त संतोष कुमार सिंह को 1999 में निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.

मांग

सत्र न्यायालय के जज जीपी थरेजा ने अपने निर्णय में कहा था कि वह जानते हैं कि हत्या संतोष ने की है, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें छोड़ा जा रहा है.

केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की थी और अभियुक्त को मृत्युदंड देने की माँग की थी.

संतोष कुमार सिंह एक वकील है और भारतीय पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी का पुत्र है.

विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस मामले में जल्द न्याय के लिए मीडिया के सहयोग से जोरदार अभियान चलाया था. इसके बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई सप्ताह में तीन दिन करने का फ़ैसला किया था.

एक पखवाड़ा पहले संतोष सिंह को दिल्ली हाइकोर्ट ने हत्या और बलात्कार का दोषी माना था और सोमवार को उन्हें दी जाने वाली सज़ा सुनाई गई है.