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रविवार, 29 अक्तूबर, 2006 को 05:07 GMT तक के समाचार

राजनीतिक दलों से बात करेंगे राष्ट्रपति

बांग्लादेश के राष्ट्रपति इयाज़ुद्दीन अहमद ने देश के चार प्रमुख राजनीतिक दलों को अंतरिम सरकार के मुद्दे पर बातचीत के लिए बुलाया है.

राष्ट्रपति ने कहा है कि वो चारों दलों से अलग-अलग बातचीत करेंगे ताकि वर्तमान राजनीतिक संकट के समाधान की ओर बढ़ा जा सके.

उन्होंने राजनीतिक दलों से कहा है कि वे रविवार का दिन बीतने तक अंतरिम सरकार के नेतृत्वकर्ता के नाम पर आपस में सहमति बना लें ताकि अगले वर्ष जनवरी में चुनाव करवाए जा सकें और देश को वर्तमान राजनीतिक संकट से उबारा जा सके.

उधर बांग्लादेश की दो प्रमुख पार्टियों बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और आवामी लीग ने कहा है कि वे कार्यवाहक सरकार के मुद्दे पर जारी संकट के हल के लिए मिल कर काम करेंगी.

पिछले दो दिनों में देशभर में इस मुद्दे पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं में 14 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हो गए हैं.

स्थिति को देखते हुए शनिवार को राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद ने हस्तक्षेप करते हुए इन दोनों राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की.

राष्ट्रपति ने दोनों राजनीतिक पार्टियों को रविवार तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के मुद्दे पर सहमति बनाने को कहा था. ढाका से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति की पहल के बाद शांति-व्यवस्था की उम्मीद जताई जा रही है.

संकट

ग़ौरतलब है कि ख़ालिदा ज़िया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार का कार्यकाल शुक्रवार मध्यरात्रि में ख़त्म हो गया था.

शनिवार को देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएम हसन को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेना था लेकिन आवामी लीग के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया.

पहले ये कहा गया था कि केएम हसन बीमार हैं लेकिन बाद में उन्होंने एक बयान जारी करके पद न संभालने का कारण बताया.

अपने बयान में हसन ने कहा कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री का पद न संभालने का फ़ैसला उन्होंने देश की जनता के हित में एक देशभक्त होने के नाते किया है.

आवामी लीग का कहना है कि केएम हसन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के हाथों की कठपुतली हैं और पार्टी उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में नहीं स्वीकार कर सकती.

नई स्थिति में शुक्रवार मध्यरात्रि को अपना कार्यकाल समाप्त कर चुकीं ख़ालिदा ज़िया पंद्रह दिनों तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहेंगी.

ढाका से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अभी राजधानी में हिंसा की छिटपुट घटनाएँ ही हुई हैं लेकिन यहाँ के लोगों को डर है कि कार्यवाहक सरकार का गठन होने के बाद हिंसा की घटनाएँ बढ़ सकती हैं.