सोमवार, 23 अक्तूबर, 2006 को 12:40 GMT तक के समाचार
सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत के रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सेना के भीतर फैलते जासूसी नेटवर्क पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इसकी जाँच हो रही है ताकि पूरे 'नेटवर्क' का पता लगाया जा सके.
पिछले कुछ दिनों में भारतीय सेना के दो कर्मचारियों की गिरफ़्तारी हुई है और उनके पास से संवेदनशील दस्तावेज़ बरामद किए गए थे.
रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने दिल्ली में तटरक्षक कमांडरों की बैठक को संबोधित करते हुए इन गिरफ़्तारियों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि जासूसी नेटवर्क जम्मू-कश्मीर से काठमांडू तक फैला हुआ है.
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय खुफ़िया एजेंसियों को ऐसी जानकारियाँ भी मिली हैं कि पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई भारतीय सेना की तीनों शाखाओं में घुसपैठ करने की कोशिश कर रही है.
उनका कहना था,"हमें पता है कि आईएसआई सक्रिय है और हम कभी-कभी कुछ लोगों को गिरफ़्तार करते हैं. हमें यह सुनिश्चित करना है कि जो भी ख़ामियाँ हैं उन्हें दूर किया जाए. हमने अंदरुनी जाँच शुरु कर दी है और कोशिश हो रही है कि उन प्रमुख लोगों को गिरफ़्तार किया जा सके जो इसके पीछे हैं."
हालाँकि पाकिस्तान ऐसे आरोपों को बार-बार ख़ारिज करता आया है.
भाजपा की तीख़ी प्रतिक्रिया
नौसेना के चर्चित 'वार रुम लीक' मामले में तो गिरफ्तारियाँ हुई ही हैं. हाल में दो दिन पहले दो सैनिकों - रितेश कुमार और एक सिग्नलमैन अनिल कुमार दुबे को अलग-अलग स्थानों पर गिरफ़्तार किया गया.
जानकार कहते हैं पड़ोसी देशों में जासूस रखना कोई नई बात नहीं है और हर देश इससे सतर्क रहता है.
लेकिन मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता विजय कुमार मल्होत्रा इसके लिए यूपीए सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया.
भाजपा का तो यहाँ तक कहना है कि सरकार पाकिस्तान और आईएसआई के बारे में विरोधाभासी बयान दे रही है और भारत-पाकिस्तान के बीच नवंबर में होने वाली बातचीत भी रद्द की जानी चाहिए.
भाजपा नेता मल्होत्रा कहते है, "यह कह देना काफ़ी नहीं है कि जासूस हैं. सवाल ये है कि उन्हें निकालने के लिए क्या किया गया? ये तो प्रधानमंत्री सेना को लिखते हैं कि मुसलमानों की नियुक्ति हो तो फिर जासूस तो आएँगे ही. जब सेना में मेरिट पर नियुक्ति होगी तभी तो सब कुछ सही रहेगा."
हालांकि पिछले दो दिनों में जो लोग गिरफ़्तार हुए हैं वो मुसलमान नहीं बल्कि हिंदू हैं.