सोमवार, 23 अक्तूबर, 2006 को 12:40 GMT तक के समाचार
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार.
एक कार्यक्रम जिसमें ख़ास तौर पर ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों, उनके स्वास्थ्य, उनके सशक्तिकरण और एचआईवी-एड्स पर चर्चा होती है.
आँगन के पार: दूसरी कड़ी
भारतीय संविधान में स्थानीय प्रशासन मे एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है. कितनी भागीदारी हो रही है महिलाओ की पंचायती राज में.
सरकारी आँकड़ो के अनुसार लगभग नौ लाख महिलाएँ आज पंचायती राज की अलग-अलग पायदान पर खड़ी होकर अपनी भागीदारी निभा रही हैं.
इसी सवाल पर आँगन के पार की दूसरी कड़ी में दो वैसी महिलाओं को आंमत्रित किया गया जो बिहार की सीतामढ़ी और मधुबनी ज़िले से हैं.
गीता देवी अति पिछड़ी जाति से है और मधुबनी ज़िले से हैं. उन्होंने बहुत कम उम्र मे ही तमाम विरोधों के बावजूद सरपंच का चुनाव जीता.
शैल देवी दलित है और सीतामढ़ी में रहती हैं. कर्मठ होने के बावजूद वे चुनाव तो नहीं जीत पाई लेकिन अब अपने अधिकारो के बारे में काफ़ी जागरूक हैं.
इसके अलावा बातचीत कुछ वैसी महिला सरपंच से भी जो सत्ता मे होने के बावजूद केवल रबर स्टांप की तरह है.
इन सब पर चर्चा करने के लिए मौजूद थे केंद्रीय पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर. कार्यक्रम पेश किया रूपा झा ने.
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आँगन के पार: तीसरी कड़ी
भारत सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक़ पूरे भारत में पचास से ज़्यादा प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से कम में हो जाती है.
बिहार-झारखंड में ये 71 प्रतिशत है. 21वीं सदी का एक कड़वा सच ये है कि आज भी बाल विवाह जारी है.
तीसरी कड़ी में हम चर्चा कर रहे हैं कम उम्र में लडकियों की शादी और उससे उनके मानसिक और शारीरिक प्रभाव की.
आप जानते हैं इस कार्यक्रम को बनातीं हैं आपके आसपास गाँव-देहातों मे रहने वाली कुछ महिलाएँ. बस पिरोया भर है रूपा झा ने.
महिला और बाल विकास मंत्रालय की मंत्री रेणुका चौधरी और दिल्ली मे यूनिसेफ़ संस्था के साथ बतौर सलाहकार काम कर रही डॉक्टर कनुप्रिया सिंघल ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया..
ये कार्यक्रम आप हर शुक्रवार बीबीसी हिंदी की तीसरी सभा मे सुन सकते हैं.