रविवार, 22 अक्तूबर, 2006 को 18:25 GMT तक के समाचार
नगेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने स्वीकारा है कि छोटे किसानों को ऋण देने के प्रति राष्ट्रीकृत बैंकों में कम उत्सुकता है.
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ग्रामीण विकास की दिशा में केंद्र सरकार की यह प्राथमिकता होगी कि छोटे किसानों, मजदूरों और निर्धन ग्रामीणों को बैंक और बीमा जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाए.
रधुवंश प्रसाद ने कहा कि गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक मज़बूत पहल करते हुए केंद्र सरकार मन बना रही है कि स्वयं सहायता समूहों और रोज़गार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले ग्रामीणों के बैंक में खाते खुलवाए जाएँ और उन्हें जीवन बीमा और चिकित्सा बीमा जैसी सुविधाएँ मुहैया कराई जाएँ.
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बीबीसी हिंदी सेवा के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात, बीबीसी के साथ में श्रोताओं और पाठकों के सवालों का जवाब दे रहे थे.
केंद्रीय मंत्री ने विदर्भ और आंध्रप्रदेश में किसानों की आत्महत्याओं का उदाहरण देते हुए यह भी स्वीकारा कि देश के कुछ राज्यों में महाजनी प्रथा से कर्ज़ लेने के कारण इस तरह की घटनाएँ सामने आई हैं पर इसके लिए किसानों के लिए अधिक ऋण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई.
उन्होंने कहा, "अब यह प्रावधान तय हुआ है कि अगले दो-तीन वर्षों में किसानों को दोगुना ऋण उपलब्ध कराया जाएगा और किसानों ने जो पैसा महाजनी प्रथा के अंतर्गत कर्ज़ के तौर पर लिया था उसे भी बैंक ऋणों में परिवर्तित करने का प्रयास किया जाएगा ताकि किसानों की आत्महत्याओं के घटनाओं में कमी आ सके."
उन्होंने कहा, "देश में ग़रीब किसानों और कामगारों को ऋण देने की सुविधा तो है पर हम स्वीकार करते हैं कि इसमें और सुधार करने की आवश्यकता है."
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से देशभर में अबतक लगभग 23 लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है और इनके लिए बैंकों में खाते खुलवाने का काम हो रहा है.
उपेक्षा क्यों?
हालांकि उन्होंने ज़मीनी तौर पर इन योजनाओं के प्रभावी न हो पाने का ठीकरा बैंकों के सिर ही फोड़ा.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस दिशा में बैंकों से जितनी सहायता और सहयोग मिलने की अपेक्षा है, उतना नहीं हो रहा है.
इसी के मद्देनज़र मंत्रालय की ओऱ से वित्त मंत्रायल और भारतीय रिज़र्व बैंक को 4200 बैंकों की सूची भी सौंपी गई है.
उन्होंने बताया कि बैंकों को निर्देश दे दिए गए हैं कि किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के ज़रिए और अन्य तरीकों से भी ऋण उपलब्ध कराने को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए.
उन्होंने कहा कि बैंकों की ओर से इस स्थिति के लिए ऋण वसूली में दिक्कत जैसी बातों को सामने रखना बेबनियाद है क्योंकि स्वयं सहायता समूहों के ज़रिए 95-98 प्रतिशत तक वसूली देखने को मिली है जबकि देश का अभिजात्य वर्ग के पास लगभग डेढ़ करोड़ की नॉन परफ़ार्मिंग संपदा है.