शुक्रवार, 20 अक्तूबर, 2006 को 01:59 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का कहना है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थायी बहाली की प्रक्रिया में सेना से टकराव को टाला नहीं जा सकता.
पाकिस्तान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो ने लंदन में मुलाक़ात के बाद इस बात से इनकार किया कि उनके बीच किसी तरह के मतभेद हैं.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता बेनज़ीर भुट्टो और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता नवाज़ शरीफ़ ने कुछ माह पहले आपस में हाथ मिलाते हुए 'चार्टर ऑफ़ डेमोक्रेसी' पर दस्तख़त किए थे.
इसके बाद बेनज़ीर भुट्टो पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ़ के साथ गोपनीय संपर्क कायम करने के आरोप लगे थे.
लेकिन दोनों नेताओं ने साफ़ किया कि पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली के मुद्दे पर उनके बीच कोई मतभेद नहीं है.
सेना से टकराव
नवाज़ शरीफ़ का कहना था कि लोकतंत्र की स्थायी बहाली के दौरान सेना के साथ टकराव रोकना नामुमकिन है.
उन्होंने कहा, "हमारी जो भी माँगे हैं वो संविधान और क़ानून के दायरे में हैं, लेकिन मुशर्रफ़ अपनी धौंस जमा रहे हैं और फ़ौज का ग़लत इस्तेमाल कर रहे हैं."
दोनों नेताओं ने पाकिस्तान में अगला चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और राष्ट्रीय गठबंधन की सरकार के तहत कराने की माँग की.
नवाज़ शरीफ़ ने कहा, "मुशर्रफ़ को इस स्थिति में नहीं होना चाहिए कि वे चुनावों को प्रभावित कर सकें. हमें इस बात को लेकर संदेह है कि क्या वे वाकई स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराएँगे."
इस्तीफ़े पर चुप्पी
हालाँकि इस बार उन्होंने जनरल मुशर्रफ़ के इस्तीफ़े की माँग नहीं की जैसा कि वे पहले करते रहे हैं.
ऐसी सूरत में वो किसके सामने अपनी माँगें रख रहे हैं, नवाज़ शरीफ़ ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पाकिस्तान के लोगों को अपनी बात बता रहे हैं."
पाकिस्तान में आम चुनाव अगले वर्ष अक्तूबर में होने हैं.
दोनों नेताओं ने कहा कि वे चुनाव से पहले पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे हैं.
बनेज़ीर भुट्टो ने कहा, "मैं चुनाव से पहले पाकिस्तान जाकर वहाँ के लोगों की मदद करना चाहती हूँ."