गुरुवार, 19 अक्तूबर, 2006 को 15:33 GMT तक के समाचार
राजीव खन्ना
बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद
'चांस टू शाइन' ने गुजरात के स्कूली बच्चों की कंप्यूटर से तो जान-पहचान कराई ही है, साथ ही उन्हें ये मौका भी दिया है कि वे इंग्लैंड में बैठे गुजराती मूल के बच्चों को बता सकें कि उनमें भी 'कुछ ख़ास' है.
अपनी तरह की इस अनूठी परियोजना के तहत अहमदाबाद के 30 प्राथमिक स्कूलों को इंटरनेट के माध्यम से ब्रिटेन के 16 स्कूलों से जोड़ा गया है.
ये ब्रिटिश काउंसिल और अहमदाबाद नगर निगम की देखरेख में चलाए जाने वाले एएमसी स्कूल बोर्ड की संयुक्त परियोजना है.
इसके तहत बच्चे अपनी प्रतिभा तो दिखाएँगे ही, साथ ही उन्हें सात समंदर पार ब्रिटेन के स्कूलों में पढ़ रहे गुजराती बच्चों को दोस्त बनाने का मौक़ा भी मिलेगा.
भाषा नहीं बाधा
दरअसल, बच्चों को कंप्यूटर सिखाने के मकसद से शुरू की गई इस परियोजना में पहले इन स्कूलों के शिक्षकों को इंटरनेट की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा.
इसके बाद अगले दो साल तक इन स्कूलों के बच्चे परियोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर काम कर सकेंगे.
इससे उनकी कंप्यूटर दक्षता और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान बढे़गा और वे पश्चिमी संस्कृति से भी रूबरू होंगे.
ब्रिटिश काउंसिल के अधिकारियों का कहना है कि ब्रिटेन के स्कूलों में बड़ी संख्या में गुजराती छात्र शिक्षा हासिल कर रहे हैं और वे गुजरात के स्कूलों के बारे में जानना चाहते हैं.
एएमसी स्कूल बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र देसाई ने बीबीसी को बताया कि इस परियोजना के तहत भाषाई अवरोध को बहुभाषाई ई-मेल वेबसाइट के ज़रिए दूर किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत बच्चों को फ़िल्मों, फोटोग्राफ, वेबलिंक्स और अन्य माध्यमों से एक-दूसरे के बारे में जानने-समझने का मौक़ा मिलेगा.