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गुरुवार, 19 अक्तूबर, 2006 को 12:23 GMT तक के समाचार

आँगन के पार: पहली कड़ी

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ख़ास तौर पर ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों, उनके स्वास्थ्य, उनके सशक्तिकरण और एचआईवी-एड्स पर चर्चा होती है.

इस कार्यक्रम को गढ़ने की ज़िम्मेदारी उठाई है बारह वैसी महिलाओ ने जो पेशेवर पत्रकार तो नहीं हैं लेकिन आपके आसपास जो ज़िंदगी बसर होती है उसके ताने-बाने को वे बखूबी समझती हैं.

कार्यक्रम के संपादन और प्रस्तुतिकरण रूपा झा कर रही हैं. हर शुक्रवार को बीबीसी हिंदी और आकाशवाणी के 22 चैनलो पर प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम की पहली कड़ी मे चर्चा हो रही है एचआईवी-एड्स की.

आँगन के पार: पहली कड़ी

किस तरह महिलाएँ इस ख़तरे से जूझ रही हैं. भारत सरकार के आंकड़ो के अनुसार भारत मे इस समय 52 लाख लोग एचआईवी के वायरस के साथ जी रहे है जिनमें चालीस प्रतिशत महिलाएँ है.

कार्यक्रम मे हिस्सा लिया है राष्ट्रीय एड्स कंट्रोल संस्थान नैको की महानिदेशक सुजाता राव ने और एचआईवी के वायरस के साथ पिछले 12 सालो से निजी जीवन मे ही नही बल्कि सामाजिक जीवन मे भी डट कर मुक़ाबला कर रही शांति ने.

इसके अलावा बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश से इस मसले पर आम लोगों की राय के साथ-साथ शामिल है ग्रामीण औरतो की वो आवाज़ें जहाँ वे अपने पतियो के साथ सुरक्षित यौन संबंध के मुद्दे पर उनके साथ हो रही हिंसा पर खुल कर चर्चा कर रही हैं.