बुधवार, 18 अक्तूबर, 2006 को 22:41 GMT तक के समाचार
सुवोजीत बागची
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारतीय संसद पर दिसंबर, 2001 में हुए हमले के मामले में दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु ख़ुद राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मौत की सज़ा माफ़ करने की अपील करने वाले हैं.
मोहम्मद अफ़ज़ल की वकील नंदिता हक्सर ने बीबीसी से बातचीत में कहा, '' मोहम्मद अफ़ज़ल खुद यह अनुरोध करने वाले हैं. वो इस पर सहमत हो गए हैं और मैं इसका मसौदा तैयार कर रही हूँ.''
ग़ौरतलब है कि अफ़ज़ल के परिजन पहले ही राष्ट्रपति को क्षमादान याचिका दे चुके हैं जिसे स्वीकार कर लिया गया है.
उल्लेखनीय है कि इसके पहले ऐसी ख़बरें आईं थीं कि अफ़ज़ल ने ख़ुद सज़ा माफ़ किए जाने की अपील करने से इनकार कर दिया था.
जब उनसे पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार अफ़ज़ल को 20 अक्टूबर को फ़ाँसी दी जानी है, तो उसके बाद याचिका देने का क्या अर्थ है.
इस पर नंदिता हक्सर का कहना था कि उनकी जानकारी के अनुसार अफ़ज़ल को 20 अक्टूबर को फाँसी नहीं दी जा रही है.
हालांकि सरकार ने आधिकारिक रूप से इस बारे में कोई घोषणा नहीं की है.
कोर्ट का फ़ैसला
मोहम्मद अफ़ज़ल को सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा सुनाई थी और फ़ैसले के अनुसार 20 अक्तूबर को फाँसी दी जानी है.
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि अफ़ज़ल को 20 अक्टूबर को फाँसी की सज़ा नहीं दी जाएगी.
उनका कहना था,'' गृह मंत्रालय उनके परिवार की याचिका पर विचार कर रहा है जिसे राष्ट्रपति ने मंत्रालय के पास भेजा है.''
ग़ौरतलब है कि इसके पहले मोहम्मद अफ़ज़ल की पत्नी तबस्सुम और उनके परिवारजनों ने फाँसी की सज़ा न दिए जाने का अनुरोध किया था.
भारतीय क़ानून व्यवस्था के अनुसार राष्ट्रपति को मौत की सज़ा माफ़ करने का अनुरोध पहले गृह मंत्रालय के पास जाता है और फिर उसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जाता है.
इसके बाद मंत्रिमंडल अपनी सिफ़ारिशों के साथ उसे राष्ट्रपति के पास वापस भेजता है और फिर राष्ट्रपति उस पर फ़ैसला लेते हैं. लेकिन राष्ट्रपति मंत्रिमंडल का फ़ैसला मानने के लिए बाध्य नहीं हैं.
क़ानून के जानकारों का कहना है कि जब तक माफ़ी की अपील पर फ़ैसला नहीं हो जाता तब तक उस शख्स को मौत की सज़ा नहीं दी जाती.