मंगलवार, 17 अक्तूबर, 2006 को 12:03 GMT तक के समाचार
गीता पांडे
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत की राजधानी दिल्ली में अदालत ने कहा है कि शहर के निजी नर्सरी स्कूलों में दाखिले के लिए बच्चों और उनके अभिभावकों का साक्षात्कार नहीं लिया जाएगा.
वर्तमान में नर्सरी स्कूलों में दाखिले से पहले बच्चों और उनके माता-पिता को लंबे चौड़ी इंटरव्यू से गुज़रना पड़ता है.
लेकिन अभिभावक इस प्रकिया की कड़ी आलोचना करते रहे हैं.उनका कहना है कि इससे बच्चों और उन्हें ख़ुद काफ़ी दिक्कत होती है.
अभिभावकों के वकील अशोक अग्रवाल ने कहा है, "हम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं,ये सकारात्मक क़दम है."
उन्होंने कहा, "कोर्ट के फ़ैसले से तीन-चार साल के बच्चों को होने वाली दिक्कत ख़त्म होगी."
बातचीत करने का अधिकार?
लेकिन दिल्ली में स्कूलों ने अदालत के इस फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं.
स्थानीय लक्ष्मण पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल उषा राम ने कहा, "अगर हमें बच्चों और उनके माता-पिता से बातचीत करने का मौका नहीं मिलेगा तो हम चयन कैसे करेंगे."
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने अशोक गांगुली की अध्यक्षता में एक पाँच सदस्यीय समिति बनाई थी ताकि नर्सरी स्कूलों में दाखिले के लिए दिशा निर्देश बनाएँ जा सकें.
समिति ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी और अदालत ने सभी अनुसंशाएँ मान ली हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मानकों के आधार पर हर बच्चे को 100 में से अंक दिए जाएँ.
मानक:
1.स्कूल के तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चों को 20 अंक मिलेंगे और जैसे जैसे स्कूल से फ़ासला बढ़ेगा अंक कम होते जाएँगे.
2.लड़कियों को तरजीह दी जाएगी
3.जिन बच्चों के भाई-बहन पहले से उस स्कूल में पढ़ते हैं उन्हें तरजीह मिलेगी
4.स्कूल के पूर्व छात्रों के बच्चों को पहले मौका मिलेगा
5.एकल माता-पिता के बच्चों के साथ भेदभाव नहीं होगा