http://www.bbcchindi.com

रविवार, 15 अक्तूबर, 2006 को 00:19 GMT तक के समाचार

पाकिस्तान में अफ़ग़ानों का पंजीकरण

पाकिस्तान में रह रहे अफ़ग़ान नागरिकों के लिए पाकिस्तान सरकार पहली बार रविवार से पंजीकरण अभियान शुरु किया है.

अनुमान है कि वहाँ पच्चीस लाख अफ़ग़ान रह रहे हैं.

इनमें से हज़ारों लोग 1979 में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत संघ का हमला होने के बाद पाकिस्तान आ गए थे और तब से वहीं रह रहे हैं.

वैसे पिछले तीस वर्षों में युद्ध की विभीषिका झेल रहे अफ़ग़ानिस्तान से भागकर लाखों लोगों ने पाकिस्तान में शरण ली.

वर्ष 2001 में तालेबान सरकार के पतन के बाद से पाकिस्तान सरकार अफ़ग़ान लोगों को प्रोत्साहित करती रही है कि वे वापस लौट जाएँ.

लेकिन अब भी पच्चीस लाख लोग यहीं रह रहे हैं और इनमें से आधे तो शरणार्थी शिविरों में हैं.

यह पूरा समुदाय बड़ा चलायमान है. कई हज़ार लोग परिवारजनों से मिलने और व्यवसाय के सिलसिले में सीमापार आना-जाना करते रहते हैं.

सरकार का कहना है कि इनमें से कई तालेबान के सदस्य हो सकते हैं लेकिन समाज से उनका रिश्ता जिस तरह का है उसके चलते उनको पहचान पाना कठिन होता है.

दस सप्ताह का अभियान

सरकार ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी की मदद से दस सप्ताह तक यह पंजीकरण अभियान चलता रहेगा.

सरकार का कहना है कि इससे उसे पता चल सकेगा कि कौन लोग यहाँ रह रहे हैं और इससे उन पर निगरानी रखना भी आसान होगा.

पंजीकरण के साथ अफ़ग़ानों को एक परिचय पत्र भी दिया जाएगा जिससे उनको अधिकतम तीन और साल तक पाकिस्तान में रहने की पात्रता मिल जाएगी.

इस बीच पाकिस्तान धीरे-धीरे शरणार्थी शिविरों को बंद करना चाहता है. वह चाहता है कि अफ़ग़ान अपने घरों को वापस लौट जाएँ. लेकिन सरकार के लिए यह आसान नहीं होगा.

सर्वेक्षण से पता चला है कि अफ़ग़ान पाकिस्तान में ही रहना चाहते हैं.

इसका एक कारण तो सुरक्षा की स्थिति है लेकिन दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान में अपेक्षाकृत जल्दी और अच्छा रोज़गार मिल जाता है.