शुक्रवार, 13 अक्तूबर, 2006 को 15:11 GMT तक के समाचार
राजीव खन्ना
बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद
गुजरात हाई कोर्ट ने गोधरा कांड के तकनीकी पहलुओं की जाँच के लिए बनर्जी आयोग का गठन करने के फ़ैसले को ग़लत ठहराया है.
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 27 फरवरी 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं से भड़ी साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन को जलाने की कथित घटना की तकनीकी जाँच के लिए बनर्जी आयोग का गठन किया था.
इस घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे फैल गए थे.
ट्रेन के ही एक यात्री नीलकंठ भाटिया ने बनर्जी आयोग के गठन को अदालत मे चुनौती दी थी.
उन्होंने अपनी दलील में कहा कि एक ही घटना की जाँच दो अलग अलग आयोगों से नहीं कराई जा सकती.
उल्लेखनीय है कि गोधरा कांड और इसके बाद फैली सांप्रदायिक हिंसा की जाँच पहले से ही जस्टिस जीटी नानावती और जस्टिस केजी शाह आयोग कर रही है.
बनर्जी आयोग की रिपोर्ट
बनर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साबरमती एक्सप्रेस के बोगी संख्या छह में लगी आग महज दुर्घटना थी.
गुजरात उच्च न्यायाल ने इस रिपोर्ट को संसद में पेश किए जाने से रोक दिया था.
याचिकाकर्ता नीलकंठ भाटिया के वकील योगेश मेहता ने कहा, "अदालती आदेश में कहा गया है कि बनर्जी आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश नहीं की जाएगी और इसका कहीं और भी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. इसे पूरी तरह ख़ारिज कर दिया गया है."
मोदी की प्रतिक्रिया
हाई कोर्ट के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बनर्जी आयोग का गठन राजनीति से प्रेरित था.
उन्होंने कहा कि इसका मक़सद गोधरा कांड के दोषियों को बचाना और उस समय बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा उठाना था.
इस मामले से जुड़े एक अन्य वकील विजय पटेल ने कहा कि अदालत के इस फ़ैसले को गुजरात हाई कोर्ट की ही खंडपीठ और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.
घटना
साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग में हिंदू समुदाय के 59 लोग जिंदा जल गए थे.
इसके बाद भड़की हिंसा में लगभग एक हज़ार लोग मारे गए थे जिनमें मुसलमानों की संख्या अधिक थी.
सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के उपायों और इसके शिकार हुए परिवारों को न्याय दिलाने में विफल रहने के मुद्दे पर गुजरात सरकार की आलोचना होती रही है.