गुरुवार, 12 अक्तूबर, 2006 को 17:24 GMT तक के समाचार
श्रीलंका के उत्तरी शहर जाफ़ना में बुधवार को श्रीलंका के सैनिकों और तमिल विद्रोहियों के बीच हुई भीषण लड़ाई में कम से कम 129 सैनिकों के मारे जाने की ख़बर है.
तमिल विद्रोहियों ने इस लड़ाई में अपने 22 लड़ाके मारे जाने की पुष्टि की है, हालाँकि सेना ने कहा है कि उसने 200 तमिल विद्रोहियों को मार दिया है.
श्रीलंका की सेना ने कहा है कि उसने 55 सैनिकों के शव बरामद कर लिए हैं जबकि तमिल विद्रोहियों ने बाक़ी 74 शव रैडक्रॉस को सौंप दिए हैं.
2002 में दोनों पक्षों के बीच हुए युद्ध विराम समझौते के बाद से किसी एक दिन में मारे गए सैनिकों की यह बड़ी संख्या है इसलिए श्रीलंका की सेना के लिए इसे एक भारी झटका बताया जा रहा है.
उस युद्ध विराम समझौते में 23 वर्षों से जारी गृहयुद्ध को अस्थाई रूप से रोकने की सहमति हुई थी लेकिन हाल के महीनों में दोनों पक्षों में जब-तब लड़ाई होने की ख़बरें मिलती रहती हैं.
श्रीलंका की सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर प्रसाद समरसिंघे ने बीबीसी को बताया कि बुधवार को हुई भीषण लड़ाई में 283 सैनिक ज़ख़्मी भी हुए हैं. यह लड़ाई बुधवार को लगभग पूरे दिन ही चली बताई गई है.
प्रवक्ता ने पुष्टि करते हुए कहा कि 78 अन्य सैनिक लापता हैं. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि तमिल विद्रोहियों ने जो शव रेडक्रॉस के ज़रिए सौंपे हैं उन पर अभी परीक्षण और शिनाख़्त की प्रक्रिया की जानी है.
ब्रिगेडियर समरसिंघे ने कहा कि एक सैनिक को तमिल विद्रोहियों ने जीवित पकड़ लिया है.
संख्या पर विवाद
सेना ने कहा है कि उसने 200 तमिल विद्रोहियों को मार दिया है, हालाँकि तमिल विद्रोहियों ने पुष्टि करते हुए कहा कि उनके सिर्फ़ 22 लड़ाके मारे गए हैं.
तमिल विद्रोहियों की तरफ़ मारे गए लड़ाकों की संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना असंभव है और दोनों पक्ष अक्सर मृतकों की संख्या को अपने हित में जोड़-तोड़कर पेश करते हैं.
तमिल सैनिकों और तमिल विद्रोहियों के बीच यह लड़ाई उस सामरिक मार्ग के पास हो रही थी जो जाफ़ना प्रायद्वीप देश के बाक़ी हिस्सों से जोड़ती है.
जाफ़ना शहर पर अभी सरकार का नियंत्रण है लेकिन इस प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्से में विद्रोहियों के नियंत्रण वाला इलाक़ा पड़ता है.
बीबीसी तमिल सेवा के एथिराजन अनबरासन का कहना है कि ऐसा लगता है कि जाफ़ना प्रायद्वीप के और ज़्यादा इलाक़े पर नियंत्रण करने की सेना की कोशिश उल्टी पड़ गई है.
लड़ाई की भीषणता और मृतकों की भारी संख्या से यह पता चलता है कि इस गृह युद्ध का कोई सैनिक हल निकल पाना कितना मुश्किल है.
बीबीसी संवाददाता दुमीथा लूथरा का कहना है कि श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच इस महीने के अंत में जो बातचीत प्रस्तावित है उस पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं.