गुरुवार, 12 अक्तूबर, 2006 को 13:26 GMT तक के समाचार
नेपाल में एक उच्चस्तरीय जाँच दल ने अभूतपूर्व क़दम उठाते हुए राजशाही के ख़िलाफ़ आंदोलन को दबाने में कथित भूमिका पर राजा ज्ञानेंद्र से स्पष्टीकरण माँगा है.
इस वर्ष शुरु में लोकतंत्र की वापसी की माँग को लेकर नेपाल में राजा के ख़िलाफ़ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद अप्रैल में नेपाल नरेश ने सत्ता की बागडोर सात दलों के गठबंधन को सौंप दी थी.
नेपाल नरेश पर आरोप है कि उन्होंने लोकतांत्रिक आंदोलन को जबरन दबाने की कोशिश की.
पूछताछ
राजशाही ख़त्म होने के बाद प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला ने लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कथित साज़िश की जाँच कराने के आदेश दिए थे.
जाँच दल के प्रवक्ता दिल्ली रमण आचार्य ने बीबीसी को बताया कि नेपाल नरेश को लिखित सवाल भेज दिए गए हैं जिनका उन्हें जवाब देना है.
नेपाल नरेश से क्या सवाल पूछे गए हैं, यह बताने से उन्होंने इनकार कर दिया.
नेपाल में राजा की हैसियत हमेशा क़ानूनी प्रावधानों से उपर रही है और इससे पहले किसी सरकारी एजेंसी ने उनसे पूछताछ नहीं की है.
हालाँकि बदले हालात में राजा की छवि ख़राब हो चुकी है और गठबंधन सरकार ने राजा से लगभग सारे अधिकार छीन लिए हैं.
कार्रवाई
जून में गठन के बाद से इस जाँच दल ने दो सौ से अधिक अधिकारियों से पूछताछ की है जिसमें कई पूर्व मंत्री और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख शामिल हैं.
जाँच दल ने साफ किया है कि आंदोलन को कुचलने की साजिश का दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की सिफ़ारिश की जाएगी.
इस पाँच सदस्यीय जाँच दल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कृष्ण जंग कर रहे हैं.
राजशाही के विरोध में हुए आंदोलन में 21 लोग मारे गए थे और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे.