भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में ग़ैर-पंजीकृत हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए योजना बनाई गई है.
प्रशासन अगले महीने शहर के सभी पंजीकृत हाथियों के कान में माइक्रोचिप लाइसेंस प्लेट लगाने जा रहा है.
एक माइक्रोचिप लाइसेंस प्लेट को हाथियों के कान में लगाने में महज 200 रुपए खर्च होंगे.
मुंबई में क़ानूनी रूप से पंजीकृत चार ही हाथी हैं लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में करीब दर्ज़न भर हाथी हैं.
मुंबई के थाणे ज़िले के उप वन संरक्षक सरफराज़ ख़ान ने बीबीसी को बताया कि शहर में ग़ैर-पंजीकृत हाथियों से स्थानीय लोगों को काफ़ी समस्या होती है.
वो कहते हैं, ''कुछ ग़ैर-पंजीकृत हाथी शहर के अंदर प्रवेश कर ट्रैफिक के लिए मुसीबत बन जाते हैं और कुछ लोग इससे भयभीत हो जाते हैं. इसके सहारे भीख भी माँगी जाती है.''
सरफराज़ ख़ान कहते हैं कि जिनके हाथी पंजीकृत हैं वे इस तरह की समस्या नहीं पैदा करते.
वो कहते हैं कि कुछ हाथी के मालिक दूसरों के लाइसेंस की फोटोकॉपी लेकर प्रशासन को धोखा भी देते हैं. इसलिए ये फ़ैसला किया गया कि चावल के दाने के आकार का माइक्रोचिप लाइसेंस पंजीकृत हाथियों के कान में लगा दिए जाए.
वो बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में समारोहों में प्रयोग में लाए जाने वाले जानवरों के लिए इस तरह की पंजीकरण प्रणाली इस्तेमाल में लाई जा रही है. केरल में तेंदुए के ऊपर भी यह प्रयोग किया गया था.
हाथियों से समस्या
दरअसल इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब पिछले महीने लक्ष्मी नामक 30 वर्षीय हाथी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. लक्ष्मी को कथित रूप से शराब पिए एक ड्राइवर ने अपनी गाड़ी से टक्कर मार दी थी.
इसके बाद बॉलीवुड अभिनेता और पीपुल फ़ॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स यानी पेटा की भारतीय शाखा के संरक्षकों में से एक राहुल खन्ना ने शहर में हाथियों के घुसने पर रोक लगाने की माँग की थी.
इस योजना को बॉम्बे सोसायटी फ़ॉर द प्रिवेंशन ऑफ़ क्रुएलटी टू एनिमल्स के सहायक सचिव सुरेश कदम ने तैयार किया है.
वो कहते हैं, '' मुंबई एक व्यावसायिक ज़गह है और सड़कों के बगल में इतनी ज़गह नहीं होती कि आराम से हाथी चल सकें. लोग अमूमन भीख माँगने के लिए इन हाथियों का इस्तेमाल करते हैं. हम ऐसे हाथियों को प्रतिबंधित करना चाहता हैं ताकि वे अपने प्राकृतिक वातावरण में लौट सकें.''