शुक्रवार, 06 अक्तूबर, 2006 को 21:50 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान को दौरे पर गए अमरीकी सीनेटर जैक रीड ने कहा है कि पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान के साथ लगती अपनी सीमा पर नियंत्रण कायम करने के लिए और प्रयास करने की ज़रूरत है.
उनका कहना था कि तालेबान के पाकिस्तान में आसानी से संगठित होने जैसे की गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासन को कदम उठाने चाहिए.
डेमोक्रैटिक पार्टी के सीनेटर जैक रीड का कहना था कि वहाँ अल क़ायदा से संबंधित तत्वों की पहचान करने की कोशिशें जारी रहनी चाहिए क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि ये लोग अब भी वहाँ हैं.
अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने कई बार पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह विद्रोहियों को सीमा पार कर अफ़ग़ानिस्तान में हमले करने की आज़ादी देता है.
पाकिस्तान इन आरोपों का खंडन करता आया है.
'अफ़ग़ान-पाक पश्तूनों का जिरगा'
उधर बीबीसी संवाददाता को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि तालेबान की हिंसा ख़त्म करने के लिए वे पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के पश्तून क़बायिलियों की जिरगा या महापरिषद बुलाना चाहते हैं.
दोनो देशों के बीच तालेबान का सामना करने के बारे में काफ़ी मतभेद हैं. अधिकतर तालेबान पश्तून हैं.
राष्ट्रपति करज़ई का कहना था कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल तक होने वाले इस महापरिषद के सम्मेलन में वे और पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ दोनो भाग लेंगे.
राष्ट्रपति करज़ई का कहना था कि यदि पाकिस्तान जिरगा के बारे में पारदर्शी होता है तो दोनो देशों के बीच शांति कायम हो सकती है.
उनका कहना था, "जिरगा का मतलब है प्रतिनिधित्व और जो प्रतिनिधित्व नहीं करते वे वहाँ नहीं हो सकते और उन्हें वहाँ बुलाया भी नहीं जा सकता. अफ़ग़ानिस्तान में कोई भी जाली जिरगा आयोजित नहीं कर सकता...और मैं उम्मीद करता हूँ कि पाकिस्तान भी इसी तरह की पारदर्शिता दिखाएगा."