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शुक्रवार, 06 अक्तूबर, 2006 को 14:37 GMT तक के समाचार

श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

विनोद शर्मा ने इस्तीफ़ा दिया

हरियाणा मंत्रिमंडल के सबसे शक्तिशाली मंत्री और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सबसे क़रीबी माने जाने वाले विनोद शर्मा को आख़िरकार इस्तीफ़ा देना पड़ा.

उन्होंने अपना इस्तीफ़ा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दिया है.

विनोद शर्मा चर्चित मॉडल जेसिका लाल की हत्या के मामले में अभियुक्त सिद्धार्थ वशिष्ठ या मनु शर्मा के पिता हैं.

विनोद शर्मा को जब मुख्यमंत्री हुड्डा ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था तब भी कुछ सवाल उठे थे लेकिन जेसिका लाल की हत्या मामले के फिर से खुलने के बाद विनोद शर्मा पर इस्तीफ़े का दबाव बढ़ गया था.

हालांकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने विश्वास पात्र विनोद शर्मा का लगातार बचाव करते रहे हैं.

इस बात ने तब और तूल तब पकड़ा जब हाल ही में एक टीवी चैनल ने ख़ुफ़िया कैमरे की मदद से यह दिखाया कि विनोद शर्मा ने ग़लत तरीके से जेसिका लाल हत्याकांड के प्रमुख गवाहों को तोड़ने का काम किया था.

इसके बाद से विनोद शर्मा पर दबाव और बढ़ा. आखिरकार पार्टी हाईकमान ने उनसे इस्तीफ़ा माँग ही लिया.

हालांकि मुख्यमंत्री इस ख़बर के बाद भी खामोश ही रहे पर बताया जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के कुछ मित्रों ने उन्हें सुझाव दिया कि जेसिका लाल हत्याकांड को लेकर उनकी और पार्टी की छवि को धक्का लग रहा है.

नैतिकता की मिसाल

वैसे पार्टी विनोद शर्मा के इस्तीफ़े को नैतिकता की मिसाल बता रही है.

इस बाबत पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "विनोद शर्मा पर कोई दबाव नहीं था. उन्होंने नैतिकता के नाते इस्तीफ़ा दिया है और पार्टी उनके इस क़दम का स्वागत करती है."

उधर हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के चेहरे पर उनके मित्र के इस्तीफ़े की वजह से उभरी चिंता साफ़ दिखाई दे रही है.

हालांकि विनोद शर्मा के इस्तीफ़े पर वो पार्टी हाईकमान की ही भाषा बोलते नज़र आए पर इसके साथ ही उन्होंने विनोद शर्मा के बचाव की भी कोशिश की.

उन्होंने कहा, "हाईकमान ने उनसे इस्तीफ़ा नहीं माँगा. उन्होंने स्वयं नैतिकता के आधार पर यह क़दम उठाया है."

राजनीतिक विश्लेषक पार्टी के इस क़दम को सही पर देर से उठाया गया क़दम मानते हैं.

वहीं हरियाणा की राजनीति पर नज़र रखने वाले विनोद शर्मा की विदाई को मुख्यमंत्री के लिए शुभ संकेत नहीं मानते हैं क्योंकि उनके मंत्रिमंडल में कम ही लोग हैं जो कि उनके विश्वासपात्र हैं.