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बुधवार, 04 अक्तूबर, 2006 को 03:10 GMT तक के समाचार

पाक कार्रवाई करके दिखाए-मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत के सबूतों पर अब पाकिस्तान को मुंबई बम विस्फोटों के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करके दिखाना चाहिए.

दक्षिण अफ़्रीका की चार दिवसीय यात्रा से वापस लौटते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि यदि पाकिस्तान शांति वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है तो उसे 'आतंकवाद से संयुक्त रुप से निपटने' के अपने वादे पर अमल करके भी दिखाना होगा.

उल्लेखनीय है कि गत जुलाई में मुंबई में एक साथ हुए सात विस्फोटों में मुंबई पुलिस ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा का हाथ बताते हुए पुख़्ता सबूत होने का दावा किया था.

इन विस्फोटों में 187 लोग मारे गए थे और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे.

इसके बाद पाकिस्तान ने इस दावों को खोखला बताते हुए सबूत पाकिस्तान को सौंपने की चुनौती दी थी.

इसका जवाब देते हुए भारत ने कहा था कि सारे सबूत पाकिस्तान को सौंप दिए जाएँगे.

चुनौती

अपने विशेष विमान में पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हवाना में मैंने और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने संयुक्त बयान में आतंक से संयुक्त रुप से लड़ने का ऐलान किया था."

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि पाकिस्तान को कार्रवाई करके दिखाना होगा....जब तक दोनों देश इस समस्या पर मिलकर काबू नहीं पाएँगे शांति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती."

भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को सबूत दे दिए जाएँगे और देखा जाएगा कि वे अपनी बातों के प्रति कितने गंभीर हैं.

आतंक से लड़ने के लिए भारत-पाकिस्तान के संयुक्त अभियान की भारतीय जनता पार्टी की निंदा को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अभी कोई कार्यप्रणाली तय नहीं हुई है. इसके तय होने के बाद हमें इसका परीक्षण करना होगा और हम परीक्षण करेंगे.

परमाणु मसला

भारत-अमरीका परमाणु समझौते से जुड़े एक सवाल पर प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि इस पर अभी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भारत को इंतज़ार करना होगा कि अगले महीने इस पर क्या होता है.

उन्होंने कहा कि भारत चाहता था कि यह समझौता मार्च 2006 के पहले हो जाए लेकिन वैधानिक प्रक्रिया से होने वाले विलंब के लिए कुछ नहीं किया जा सकता.

उल्लेखनीय है कि अभी इस समझौते तो अमरीकी कांग्रेस की समहति मिलनी बाक़ी है.

पहले इस पर जुलाई में मत विभाजन होना था लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया.