मंगलवार, 03 अक्तूबर, 2006 को 15:44 GMT तक के समाचार
सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत के बेहतरीन अस्पतालों में से एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) इन दिनों मच्छरों और मच्छरों से पीड़ित मरीज़ों से जूझ रहा है.
पिछले एक हफ्ते में मच्छरों से फ़ैलने वाली बीमारी डेंगू के रोगियों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है और अधिकतर मरीज़ एम्स में ही भर्ती किए जा रहे हैं.
हैरानी की बात ये है कि एम्स के कर्मचारियों में भी डेंगू तेज़ी से फैला है और कई कर्मचारी बीमार हैं.
रेसीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा बताते हैं कि अभी तक अस्पताल में डेंगू के 46 मामले आए हैं जिनमें से 16 एम्स कर्मचारियों के ही हैं.
हालांकि पिछले कुछ दिनों में अस्पताल परिसर में साफ सफाई तेज़ी से हुई है.
मैं जब वहाँ पहुँचा तब भी कई सफ़ाई कर्मचारी घास-फूस हटाने और पानी में केरोसीन डालते हुए दिखे.
इन कर्मचारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि पिछले कुछ दिनों में साफ-सफ़ाई का काम तेज़ हो गया है और अब जहाँ कहीं भी थोड़ा सा भी पानी जमा दिखाई देता है तुरंत सफाई होती है.
असली कारण
जब एम्स परिसर में सफाई इतनी बेहतरीन हो रही है तो फिर डेंगू फैला क्यों. सफाई कर्मचारी बताते हैं कि इसका प्रमुख कारण एम्स की चहारदीवारी के पास से बहने वाला बड़ा नाला है जो बुरी तरह गंदा है.
मुझे लगा कि यह नाला एम्स परिसर से दूर होगा लेकिन नहीं. यह नाला चहारदीवारी से लग कर बहता है. नाले से मुश्किल से 20 मीटर दूर एक तरफ एम्स के कर्मचारियों के घर हैं तो दूसरी तरफ आम लोगों के घर बने हुए हैं.
नाली बुरी तरह से गंदी है और मच्छरों की संख्या लाखों में तो ज़रुर ही होगी. इस नाले में न तो डीडीटी छिड़का जा रहा है और न ही कुछ और किया जा रहा है.
नाले के बारे में अनिल शर्मा की राय बड़ी तल्ख थी. उनका कहना था, "सबको पता है इस नाले के बारे में. जब जब डेंगी और मलेरिया फैलता है तो लोग इस नाले की बात करते हैं लेकिन इसे ढंकने की किसी को फिक्र नहीं. नगर निगम कुछ नहीं करता. हम कई बार शिकायत कर चुके हैं."
तो फिर बात साफ है. जब एम्स जैसे संस्थान के पास बहते नाले को ढंका नहीं जा सकता तो फिर पूरी दिल्ली में बहने वाले सैकड़ों नालों के बारे में क्या कहा जाए जो आए दिन डेंगू, मलेरिया और न जाने क्या क्या फैलाते रहते हैं.