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सोमवार, 02 अक्तूबर, 2006 को 20:24 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
जयपुर से

उपवास से एक और शख्स ने प्राण त्यागे

राजस्थान में जैन समुदाय के एक और व्यक्ति अमर चंद ने उपवास की संथारा परंपरा का निर्वाह करते हुए सोमवार को अजमेर में प्राण त्याग दिए.

पिछले एक सप्ताह में ये दूसरा मौक़ा जब संथारा परंपरा के तहत किसी ने मौत को गले लगाया है.

इससे पहले जयपुर की विमला देवी ने 28 सितंबर को लंबे उपवास के बाद प्राण त्याग दिए थे.

जोधपुर स्थित जैन समता वाहिनी के मुताबिक राजस्थान में हर साल संथारा विधि से 'लगभग एक सौ व्यक्ति मोक्ष हासिल करते हैं.’

पिछले कुछ समय से बीमार 76 साल के अमर चंद ने शुक्रवार को संथारा पद्धति का अनुसरण करते हुए अन्न जल त्याग दिया था.

अमर चंद ने जब अंतिम सांस ली तो माहौल पूरा धार्मिक था और समुदाय के लोग मंत्रों का जाप कर रहे थे.

अमर चंद की पुत्र वधू सुमन का कहना है,'' यह शोक की वेला नहीं है क्योंकि संथारा को ज़रिए देह त्याग आत्म शुद्धि और मोक्ष का मार्ग है. ''

अमर चंद के देह त्याग की सूचना मिलते ही जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में अमर चंद के निवास स्थान पर पहुँच गए.

विवाद

जयपुर में 93 वर्षीय कैला देवी और बीकानेर में धन्नी देवी ने भी संथारा का अनुसरण करते हुए पिछले कुछ दिनों से अन्न जल त्याग दिया है.

वयोवृद्ध धन्नी देवी के परिजनों का कहना है कि उनके परिवार में पहले से ही संथारा का पालन किया जाता रहा है. दूसरी ओर कैला देवी पिछले एक माह से संथारा पर हैं.

जैन समता वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव सोहन मेहता ने बीबीसी को बताया,'' जैन समाज में संथारा सदियों पुरानी परंपरा है और प्रतिवर्ष एक सौ लोग इस परंपरा के ज़रिए आत्म शुद्धि और मुक्ति का मार्ग चुनते हैं.''

उनका कहना था, '' जिस तरह से हमारी धार्मिक मान्यता और संथारा परंपरा को चुनौती दी जा रही है. उससे जैन समाज बहुत उत्तेजित है. इसकी तुलना सती प्रथा और आत्महत्या से करना अनुचित है. हम इसका विरोध करेंगे.''

संथारा को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है. इस पर पांच अक्टूबर को सुनवाई होगी.

याचिकाकर्ता के वकील माधव मिश्र कहते हैं,'' संथारा एक ग़लत परंपरा है और हम अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे.''

इधर राजस्थान सरकार का कहना है कि अदालत जो भी निर्णय देगी उसका पालन किया जाएगा.