सोमवार, 02 अक्तूबर, 2006 को 14:28 GMT तक के समाचार
गॉर्डन कोरेरा
सुरक्षा संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
पाकिस्तान में परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान की बेटी ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के दावे का खंडन किया है.
राष्ट्रपति परवेज़ ने अपनी किताब 'इन द लाइन ऑफ़ फ़ायर' में दावा किया है कि अब्दुल क़दीर ख़ान ने अपनी बेटी से कहा था कि वे ब्रितानी पत्रकार के माध्यम से देश के परमाणु जानकारी के बारे में सार्वजनिक रूप से बयान दें.
अब अब्दुल क़दीर ख़ान की बेटी दीना ख़ान ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के दावे को हास्यास्पद कहा है.
ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु जानकारी उपलब्ध कराने की बात स्वीकार करने के बाद अब्दुल क़दीर ख़ान को उनके घर में नज़रबंद कर दिया गया था.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की किताब में इस बारे में दी गई जानकारी पर दीना ख़ान का बयान बीबीसी को मिला है. दीना ख़ान ने दावा किया है कि वो पत्र उनकी माँ के लिए था.
ये पत्र उस स्थिति में सार्वजनिक होना था अगर डॉक्टर क़दीर ख़ान के साथ कुछ बुरा घटित होता.
दीना ख़ान का कहना है, "इस पत्र में मेरे पिता ने ये बताया था कि वाकई क्या हुआ था. उन्होंने मेरी माँ से अनुरोध किया था कि अगर उनकी हत्या हो जाती है या वे ग़ायब हो जाते हैं, तो इस स्थिति में ये जानकारियाँ सार्वजनिक कर दी जाएँ."
दीना ख़ान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उस पत्र में सिर्फ़ 'लोगों और स्थानों' का ज़िक्र था. उसमें कोई परमाणु जानकारी नहीं थी.
अब्दुल क़दीर ख़ान की बेटी दीना ख़ान का कहना है कि इस मामले में ब्रितानी सुरक्षा एजेंसी एमआई-5 ने भी उनके पूछताछ की थी और अधिकारी उनसे संतुष्ट थे.
उनका दावा है कि उन्होंने कोई ग़लत काम नहीं किया और ना ही उनके पास कोई अहम जानकारी ही है. दीना ख़ान कहती हैं, "मेरे पिता ने सिर्फ़ ये ग़लती की कि वे सत्ता में मौजूद लोगों के बारे में बहुत खुल कर बोलते थे और वे उसी की क़ीमत चुका रहे हैं."
उन्होंने बताया कि उनकी बहन को माता-पिता से मिलने नहीं दिया गया और एक साल तक उन्हें पाकिस्तान भी नहीं जाने दिया गया.
दीना ख़ान ने आगे बताया, "हमारे पत्र खोले गए, हमारे मोबाइल फ़ोन टैप किए गए और हमारे घर पर नज़र रखी गई."
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है, "परमाणु जानकारी लीक होने के मामले में आधिकारिक जाँच पूरी हो गई है लेकिन मेरे पिताजी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है."
दीना ख़ान ने कहा कि शायद उम्मीद की जा रही है कि उनके पिताजी को घर में नज़रबंद करके सड़ा दिया जाएगा. लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा और एक दिन सच्चाई सामने आएगी और ऐसा हमेशा होता है.
घटनाक्रम
फरवरी 2003 में जब परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पर्यवेक्षकों ने ईरान के नतांज़ प्लांट का दौरा किया था. जाँच के दौरान उन्होंने महसूस किया कि ईरान में इस्तेमाल की जा रही मशीने उसी डिज़ाइन की है जिस पर डॉक्टर ख़ान ने काम किया था.
उसी समय लीबिया के राष्ट्रपति कर्नल मुअम्मार गद्दाफ़ी ने अपना परमाणु कार्यक्रम ख़त्म करने के मुद्दे पर एमआई-6 के साथ गुप्त रूप से संपर्क किया.
लीबिया का परमाणु कार्यक्रम भी क़दीर ख़ान और उनके नेटवर्क के ज़रिए चल रहा था. सितंबर 2003 में अमरीका ने क़दीर ख़ान के मुद्दे पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर दबाव बढ़ाया.
सीआईए के तत्कालीन निदेशक जॉर्ज टेनेट ने उस समय न्यूयॉर्क के एक होटल के कमरे में परवेज़ मुशर्रफ़ के सामने सबूत भी रखे थे लेकिन उस समय राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कोई क़दम नहीं उठाया.
अमरीका में इस मुद्दे पर लगातार चिंता बढ़ रही थी और वर्ष 2004 के जनवरी में तत्कालीन विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को फ़ोन करके बताया कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सार्वजनिक रूप से डॉक्टर ख़ान का नाम लेने वाले थे.
नतीजा ये हुआ कि डॉक्टर क़दीर ख़ान को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के सामने पेश किया गया और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी ग़लती स्वीकार करनी पड़ी.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए को डॉक्टर ख़ान से पूछताछ के लिए कभी अनुमति नहीं मिल पाई. डॉक्टर क़दीर ख़ान का मुद्दा पाकिस्तान के लिए काफ़ी संवेदनशील रहा है.
अभी भी डॉक्टर क़दीर ख़ान नज़रबंद हैं. हालाँकि हाल ही में उनके प्रॉस्टेट कैंसर का ऑपरेशन हुआ है.