शनिवार, 30 सितंबर, 2006 को 17:20 GMT तक के समाचार
अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में ख़तरनाक़ डेंगू बुखार पाँव पसार रहा है जिससे 15 लोगों की मौत हो चुकी है.
हालत यह है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के डॉक्टर और छात्र भी इसकी चपेट में आ गए हैं.
ख़बर है कि शनिवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के एक छात्र की भी इसी के कारण मौत हो गई.
संस्थान के रेज़िंडेंट डॉक्टर एशोसिएशन के प्रवक्ता अनिल कुमार के अनुसार केवल एक सितंबर से ही इस संस्थान में डेंगू के 75 मरीज़ आए हैं और इनमें से कम से कम 26 संस्थान के ही लोग हैं.
उनके अनुसार इन 26 में से 14 संस्थान के छात्र या फिर डॉक्टर हैं.
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने स्वीकार किया कि दिल्ली में डेंगू के मामले दिखे हैं. अपनी सरकार को बचाते हुए उन्होंने कहा, "इस बीमारी के रोगियों की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ रही है और प्रशासन कदम उठा रहा है. लेकिन जितने मामले डेंगू के आए हैं उनमें से कम से कम आधे मामले हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं."
हालांकि सरकार की ओर से कुछ एहतियाती क़दम उठाए गए हैं और दिल्ली के कई रिहायशी इलाक़ों में मच्छर मारने की दवा का छिड़काव किया गया है.
मुख्यमंत्री ने कहा, "रोकथाम की बात करें तो इसके लिए विशेष गोलियाँ आ रही हैं. गोलियाँ आ जाएँगी और उनका वितरण भी शुरू हो जाएगा."
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डीके शर्मा ने बीबीसी को बताया, "पिछले दो महीने से ही साफ़ सफ़ाई के पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं और अस्पताल में कर्मचारियों के लिए ही 25 बेड रखे गए हैं. चिकित्सा के अन्य विशेष इंतज़ाम भी किए गए हैं."
दूसरी ओर एक मरीज़ का कहना था कि संस्थान में चिकित्सा सुविधा तो उपलब्ध करवाई जा रही है लेकिन लोगों को दाख़िल नहीं किया जा और कहा जा रहा है कि बेड उपलब्ध नहीं हैं.