शुक्रवार, 29 सितंबर, 2006 को 17:31 GMT तक के समाचार
पर्याप्त संख्या में सैनिक न होने के बावजूद पूरे अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेने के निर्णय को नैटो के प्रमुख ने उचित ठहराया है.
नैटो के प्रमुख जनरल जाप डी हूप ने बीबीसी से कहा है कि नैटो संघर्ष कर रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान फिर से 'आतंक के प्रशिक्षण शिविर' तब्दील न हो जाए.
उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य देशों ने और सैनिक भेजने का प्रस्ताव किया है लेकिन अभी भी 2500 सैनिक नहीं मिल रहे हैं जिनकी ज़रुरत दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में कार्रवाई के लिए थी.
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को नैटो ने घोषणा की थी कि अब वह पूरे अफ़ग़ानिस्तान का ज़िम्मा संभालेगा.
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. अमरीकी सेना के प्रवक्ता ने भी स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की सीमा से लगे कई इलाक़ों में हिंसा तीन गुना तक बढ़ी है.
इस बीच कंधार में हुए एक हमले में नैटो के एक सैनिक की मौत हुई है.
सैनिकों की कमी
गुरुवार को कार्रवाई विस्तार की जो घोषणा हुई है उसके तहत अमरीका के 12 हज़ार सैनिक भी नैटो के अंतर्गत आ जाएँगे.
लेकिन इससे नैटो की माँग पूरी नहीं होने वाली है.
पिछले कुछ महीनों से नैटो अपने सदस्य देशों से कम से कम 2500 और सैनिक भेजने की माँग कर रहा है.
जैसा कि नैटो प्रमुख ने कहा कि कुछ देशों ने और सैनिक भेजने का वादा किया है लेकिन यह संख्या अपेक्षित 2500 से अभी भी कम है.
उन्होंने उम्मीद जताई, "कुछ सहयोगी देशों ने और सैनिक भेजने की पहल की है और मैं जानता हूँ कि कुछ देश बाद में आगे आएँगे."
उन्होंने चेतावनी दी कि अफ़ग़ानिस्तान में नैटो की उपस्थिति बहुत आवश्यक है.
उन्होंने कहा, "यदि नैटो न रहा तो अफ़ग़ानिस्तान फिर से आतंक के प्रशिक्षण शिविर और मानवाधिकार उल्लंघन के के केंद्र में बदल जाएगा."
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से अफ़ग़ानिस्तान में नैटो की उपस्थिति बढ़ाने का अनुरोध किया जा रहा था.
अमरीका ने चेतावनी भी दी थी कि यदि नैटो देश इसकी स्वीकृति नहीं देते हैं तो अफ़ग़ानिस्तान में शुरु की गई लड़ाई को लोकतंत्र स्थापना के अंतिम लक्ष्य तक पहुँचाना कठिन होगा.