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गुरुवार, 28 सितंबर, 2006 को 14:50 GMT तक के समाचार

मुशर्रफ़ ने आईएसआई की हिमायत की

ब्रितानी रक्षा मंत्रालय की रक्षा अकादमी के लिए तैयार की गई एक रिपोर्ट में पाकिस्तान से जुड़ी कथित टिप्पणियों ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को ख़ासा नाराज़ कर दिया है.

बीबीसी के 'न्यूज़नाइट' कार्यक्रम ने रक्षा अकादमी के लिए एक वरिष्ठ सेना अधिकारी का तैयार किया हुआ दस्तावेज़ देखा है जिसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई अल क़ायदा को आतंकवाद में मदद कर रही है.

बीबीसी न्यूज़नाइट में परवेज़ मुशर्रफ़ का इंटरव्यू

इस दस्तावेज़ के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की सरकार एक ऐसे देश की कमान सँभाले हुए हैं जो कि अराजकता के कगार पर है.

इसके बाद ब्रितानी रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस विश्लेषण को ब्रितानी सरकार का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं माना जाना चाहिए.

ब्रितानी रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "जिस अकादमी स्तर के शोध का ज़िक्र मीडिया में किया जा रहा है वह न तो रक्षा मंत्रालय और न ही ब्रिटेन सरकार का किसी भी तरह से प्रतिनिधित्व नहीं करता है."

अनुशासित संगठन

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से जब ये पूछा गया कि रक्षा मंत्रालय के कथित विश्वलेषण के अनुसार आईएसआई आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है तो जनरल मुशर्रफ़ का जवाब था, " आईएसआई एक अनुशासित संगठन है और पिछले 27 सालो से उसने वही किया है जो सरकार ने उससे करने को कहा."

उन्होंने कहा कि शीत युद्ध की जीत में और सोवियत संघ के विघटन में आईएसआई ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

जनरल मुशर्रफ़ का दावा था, "अल क़ायदा संगठन की कमर तोड़ने का भी आईएसआई ने पूरा प्रयास किया. 680 लोगों को गिरफ़्तार कर पाना आईएसआई की मदद के बिना असंभव था. इसलिए मैं कहना चाहता हूँ कि आईएसआई पर उँगली उठाने से अच्छा है कि वही किया जाए जो पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तान का नेतृत्व चाहता है."

आईएसआई का बचाव करने के साथ साथ राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने दोहराया कि आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई में पाकिस्तान ने पूरी मदद की है.

उन्होंने कहा, “आतंकवाद के विरूद्ध चल रही लड़ाई का हम भी हिस्सा हैं और इस लड़ाई में समन्वय की कमी नहीं है. गुप्त सूचनाओं के आदान प्रदान,बड़े अभियानो में रणनीतिक स्तर पर आपसी समन्वय में कोई परेशानी नहीं है.हम इस लड़ाई में पूरा सहयोग दे रहे है और हम पूरी तरह संतुष्ट हैं.”

वहीं इस विश्लेषण में कुछ ऐसे भी संकेत दिए गए हैं कि आईएसआई को बंद कर देना चाहिए तो इस पर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने नाराज़गी छिपाने की कोशिश भी नहीं की, " मुझे ये नहीं पता था. लेकिन मेरी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मुलाक़ात होने वाली है और निश्चित रूप से मैं उनसे इस बारे में बात करूँगा."

उन्होंने नाराज़गी भरे लहजे में कहा, "हम इस बात को बर्दाश्त नहीं करेंगे कि कोई हमें आईएसआई को बंद करने की सलाह दे. कम से कम ब्रितानी रक्षा मंत्रालय से तो हम ये उम्मीद बिल्कुल नहीं रखते. यह तो ऐसे हुआ कि मैं कहूँ कि आप ब्रिटेन की ख़ुफ़िया सेवाओं को बंद कर दीजिए क्योंकि उन्हें अपना काम ठीक से नहीं आता."

हाल ही में अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई की ओर से ऐसा बयान आया था कि आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई में सफलता मिलनी तब तक मुश्किल है जब तक मदरसो में कट्टरपंथ को बढ़ावा देना बंद नहीं किया जाता.

राष्ट्रपति करज़ई के इस बयान पर जब जनरल मुशर्रफ़ से पूछा गया कि क्या कट्टरवाद को रोकने में वो असफल रहे है तो उन्होनें राष्ट्रपति करज़ई पर निशाना साधते हुए कहा, " हमारी नीति विफल नहीं हुई है. ये एक बड़ी ग़लतफ़हमी है और जानबूझकर ऐसे आरोप लगाए जा रहें है और वो भी ऐसे व्यक्ति की और से जो अपने कार्यालय से भी बाहर नहीं निकल सकता और सिर्फ काबुल के बारे में ही जानता है.हम इन आरोपो को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेंगें."

उन्होंने कहा कि मदरसो की कुछ अच्छाईयां है तो कुछ बुराईयां भी और बुराइयों से निपटने के लिए हमने एक रणनीति तैयार की है.

अधिकारिक नज़रिया नहीं

जिन दस्तावेज़ों को लेकर हंगामा हो रहा है उस पर ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि जिस अकादमिक शोध की टिप्पणियों का ज़िक्र किया जा रहा है वो किसी भी तरह से ब्रितानी रक्षा मंत्रालय या ब्रितानी सरकार का नज़रिया नहीं है.

सरकार ने कहा है, "इसे सरकारी नज़रिए की तरह से पेश करना ग़ैर-ज़िम्मेदाराना होगा और रिपोर्ट का लेखक इस बात से नाराज़ है कि उनकी टिप्पणियों को जानबूझकर इस तरह ग़लत ढंग से पेश किया गया है. बल्कि लेखक को संदेह है कि ये बीबीसी को इस उम्मीद से जारी किए गए हैं कि जिससे पाकिस्तान से हमारे रिश्तों को नुक़सान हो."

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का सामना करने के लिए हमारी जो कोशिशें हैं, पाकिस्तान उसमें प्रमुख सहयोगी है और उसके सुरक्षा बलों ने अल क़ायदा और तालेबान का सामना करने में काफ़ी बलिदान भी किया है."

बयान के मुताबिक आतंकवाद और चरमपंथ की जड़ तक पहुँचने के लिए ब्रिटेन और पाकिस्तान साथ मिलकर काम कर रहे हैं.