गुरुवार, 21 सितंबर, 2006 को 22:52 GMT तक के समाचार
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पर जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वहाँ जो स्वतंत्रता के पक्ष में बोलता है उसे पाकिस्तानी सरकार की ओर से यातनाएँ दी जाती हैं.
बीबीसी संवाददाता बार्बरा प्लैट के अनुसार वैसे तो पाकिस्तान कहता है कि कश्मीरियों को अपना भविष्य तय करने का अधिकार होना चाहिए.
उनका कहना है कि ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार इसका असल मतलब ये है कश्मीर पाकिस्तान का भाग बने.
पाकिस्तान की सरकार के एक प्रवक्ता ने इस रिपोर्ट में दिए तथ्यों को ग़लत और रिपोर्ट को गड़बड़ी पैदा करने वाली बताया है.
'जुलूस और प्रदर्शन भी नहीं'
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान और भारत से जो लोग कश्मीर की स्वतंत्रता के बारे में बात करते हैं उन्हें पाकिस्तान में बर्दाश्त नहीं किया जाता.
इस मानवाधिकार संस्था के एशिया निदेशक ब्रैड एडम्स के अनुसार, "जो लोग कश्मीर की स्वतंत्रता की बात करते हैं उनकी कई बार पिटाई होती है. उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई जाती है. उनकी किताबों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं. वे लोग सार्वजनिक तौर पर जुलूस नहीं निकाल सकते और प्रदर्शन नहीं कर सकते."
इस संस्था का ये भी कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में अधिकारों का जितना उल्लंघन होता है, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में उतना तो नहीं होता.
इस रिपोर्ट के अनुसार भारत प्रशासित कश्मीर में चल रही हिंसा में तो सुरक्षा बलों और चरमपंथियों की हिंसा में हज़ारों लोग मारे गए हैं.
लेकिन संस्था के अनुसार उसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से कश्मीरी राष्ट्रवाद के समर्थकों को दी गई यातनाएँ और हिरासत में लिए जाने के किस्सों का उसने उल्लेख किया है.
ये भी कहा गया है कि कई प्रतिबंधित गुटों समेत इस्लामी चरमपंथी गुटों
को ज़्यादा स्वतंत्रता है.
ह्यूमन राइट्स वॉच ने अंतरराष्ट्रीय मदद करने वालों से अनुरोध किया है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आए भूकंप से पीड़ित लोगों के लिए पुनर्निर्माण के लिए दी जाने वाली राशि को उन्हें मिलने वाली स्वतंत्रता और अधिकारों से जोड़ना चाहिए.