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गुरुवार, 21 सितंबर, 2006 को 02:15 GMT तक के समाचार

मुशर्रफ़-करज़ई में फिर आरोप-प्रत्यारोप

पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान की आलोचना करते हुए कहा है कि वह तालेबानों से निपटने के पर्याप्त उपाय नहीं कर रहा है.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ दोनों देशों की सीमाओं पर तालेबान की गतिविधियों का ज़िक्र कर रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भाग लेने न्यूयॉर्क पहुँचे परवेज़ मुशर्रफ़ ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि समस्या पाकिस्तान में नहीं अफ़ग़ानिस्तान में है और उसे ही क़दम उठाने होंगे.

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने महासभा में अपने भाषण में बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि 'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' का विस्तार अफ़ग़ानिस्तान से बाहर भी करना होगा.

हामिद करज़ई इससे पहले तालेबान गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान को दोष देते रहे हैं.

इन दोनों नेताओं के बयान ऐसे समय में आ रहे हैं जब दोनों की मुलाक़ात जल्दी ही अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से होनी है.

हालांकि दोनों नेताओं की हाल ही में मुलाक़ात हुई थी और दोनों ने सीमा पर चरमपंथी गतिविधियों से निपटने के लिए एक दूसरे को सहयोग देने का वादा किया था.

मुशर्रफ़ की आपत्ति

महासभा में हामिद करज़ई के भाषण के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने पत्रकारों से बात की.

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान पर सीधे निशाना साधते हुए कहा, "समस्या पाकिस्तान में नहीं, अफ़ग़ानिस्तान में है और इससे पाकिस्तान को भी परेशानी है."

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के इन आरोपों का भी खंडन कर दिया कि पाकिस्तान ने तालेबान से निपटने के लिए कुछ नहीं किया.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार उनका कहना था, "मुल्ला उमर और तालेबान के दूसरे नेता वास्तव में अफ़ग़ानिस्तान के कंधार क्षेत्र में छिपे हुए हैं."

उन्होंने कहा कि उस इलाक़े में सैन्य कार्रवाई करने की ज़रूरत है.

जनरल मुशर्रफ़ का कहना था कि एक दूसरे पर आरोप लगाने से बेहतर है कि अफ़ग़ानिस्तान अपनी सीमा के भीतर कार्रवाई करे.

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के वज़ीरिस्तान इलाक़े में क़बायली नेताओं से हुए समझौते को उचित ठहराया.

'सैन्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं'

उधर अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि उनके देश में 'आतंकवाद' से निपटने के लिए सिर्फ़ सैन्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इस लड़ाई का विस्तार पूरे क्षेत्र में किए जाने की ज़रूरत है जिससे कि 'आतंकवाद पर उसके स्रोत पर ही' हमला किया जा सके.

उन्होंने इस लड़ाई को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर ले जाने की बात कहते हुए किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन इससे पहले वे जिस तरह से अपने पड़ोसी पाकिस्तान का नाम लेते रहे हैं, उससे चलते किसी के लिए यह समझना कठिन नहीं था कि इशारा किधर है.

हालांकि पाकिस्तान हमेशा करज़ई के आरोपों का खंडन करता रहा है.