भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने सौहार्दपूर्ण माहौल में भारत-पाकिस्तान रिश्तों से जुड़े हर मुद्दे पर विस्तृत और खुलकर बात की.
वार्ता प्रक्रिया को जारी रखने की इच्छ जताते हुए दोनों नेताओं ने छह जनवरी 2004, 24 सितंबर 2004, 18 अप्रैल 2005 और सितंबर 2005 में जारी साझा बयानों के क्रियान्वयन पर प्रतिबद्धता जताई.
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि शांति प्रक्रिया हर हाल में जारी रहनी चाहिए और इसका सफल होना दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है.
मुंबई धमाकों के बाद मिले दोनों नेताओं ने आंतकवाद के हर कृत्य की निंदा की और इस बात पर सहमति जताई कि आंतकवाद एक अभिशाप है जिससे प्रभावी तरीके से निपटना ज़रूरी है.
भारत-पाकिस्तान ने आतंकवाद निरोधक जाँच के क्रियान्वयन और इस संबंध में पहचान करने के लिए संयुक्त रूप से एक संस्थागत ढांचा खड़ा करने का भी फ़ैसला किया.
दोनों देशों ने जम्मू-कश्मीर समेत सभी विवादित मुद्दों का बातचीत के ज़रिए पारस्परिक सहमति वाले हल ढूंढ़ने पर भी सहमति जताई.
जम्मू-कश्मीर के मसले पर कहा गया कि कई बार उपयोगी चर्चा हो चुकी है लेकिन अभी मतभेदों को कम करने और जिन विषयों पर सहमति है, उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है.
दोनों नेताओं ने विदेश सचिवों को निम्नलिखित निर्देश भी दिए:
दोनों देशों के विदेश सचिव समग्र वार्ता प्रक्रिया को जारी रखने के लिए ज़ल्द ही दिल्ली में मिलेंगे.
सियाचीन के मुद्दे को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए विचार-विमर्श होगा.
सरक्रीक के मसले पर इस साल नवंबर से संयुक्त सर्वे शुरू करने के लिए विशेषज्ञों को तत्काल मिलकर सर्वे किए जाने वाले क्षेत्र पर सहमति बना लेनी चाहिए. इस संदर्भ में बिना किसी पूर्वाग्रह के दोनों देशों के रुख़ का ध्यान रखा जाए.
दोनों देशों ने नियंत्रण रेखा से संबंधित सहमति बन चुके विश्वास बहाली के उपायों और समझौतों जैसे कि- बस सेवा, ट्रक सेवा के क्रियान्वयन पर भी सहमति जताई.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने फिर से भारतीय प्रधानमंत्री को पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया. मनमोहन ने इस पर मुशर्रफ़ का शुक्रिया अदा करते हुए संकेत दिया कि वह उन्हें पाकिस्तान की उपयोगी यात्रा की उम्मीद है, जिसका समय राजनयिकों के ज़रिए तय होगा.