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शनिवार, 16 सितंबर, 2006 को 17:54 GMT तक के समाचार

कालीघाट मंदिर में पंडों पर रोक

कोलकाता की एक अदालत ने सुप्रसिद्ध कालीमंदिर में पंडों पर रोक लगा दी है.

भारत भर के मंदिरों में पंडे होते हैं जो पूजा आदि के कामों में भक्तों की 'सहायता' करते हैं.

लेकिन आमतौर पर आरोप है कि ये पंडे पूजा में 'सहायता' करने की जगह पैसा वसूलने और परेशान करने का काम ज़्यादा करते हैं.

पंडे इन आरोपों का खंडन करते हैं और वे पुजारियों और भक्तों के बीच एक पुल का काम करते हैं.

रोक

पंडों पर रोक लगाने का यह फ़ैसला कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विकास श्रीधर ने सुनाया है.

अपने फ़ैलले में न्यायाधीश ने कहा है, "मंदिर के छह पुजारियों के अलावा कोई भी मंदिर के पूजा घर में नहीं जाएगा और ये छह पुजारी, जिन्हें सेवायत कहा जाता है, ही पूजा का कार्य करेंगे."

न्यायाधीश ने कहा है कि उन्होंने मंदिर में ख़ुद भी पंडों का दुर्वव्यवहार देखा है.

मंदिर जाने वाले दूसरे भक्तों का भी अनुभव इसी तरह का है.

नियमित रुप से मंदिर जाने वाली सुमंत्रा बैनर्जी का कहना है कि ये पंडे भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं और भक्तों से बहुत पैसा वसूल लेते हैं.

सुचित्रा डे एक गृहणी हैं और वे कहती हैं कि पंडों के कारण मंदिर जाना एक भयावह अनुभव होता है.

ज़्यादातर भक्तों ने अपने इसी तरह के अनुभव के कारण इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

कुछ लोगों का कहना है कि इसी तरह की रोक पूरे भारत के मंदिरों में लगा देनी चाहिए.