शुक्रवार, 15 सितंबर, 2006 को 12:54 GMT तक के समाचार
सलमान रावी, रांची से
भारत के झारखंड राज्य में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा के नेतृत्व में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है.
मधु कोड़ा ने भावी चुनौतियों और अपनी योजनाओं पर बीबीसी से बात की.
पेश हैं उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश-
पिछले 15 दिनों से झारखंड का राजनीतिक परिवेश काफी गर्म था. क्या चुनौतियाँ देखते हैं आप?
हमारे सामने कई चुनौतियां आ गई हैं. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार से लोग त्रस्त थे और भ्रष्टाचार चरम पर था. लोग, ख़ासकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग काफ़ी असुरक्षित महसूस कर रहे थे. ये सारी चुनौतियाँ हमारे सामने हैं. हम सही मायनों में धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाएँगे. हम एक ऐसी सरकार देना चाहते हैं, जिससे सभी जाति धर्म के लोग सुरक्षित महसूस कर सके.
सबसे बड़ी चुनौती विकास की है. कई क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं हैं. इसमें कृषि क्षेत्र भी शामिल है और औद्योगिक क्षेत्र भी.दबे-कुचले लोगों और आदिवासियों की सुनी जाएगी और उनकी समस्याओं को सुलझाने के प्रयास किए जाएंगे.
यदि आपका गठबंधन सरकार बनाता है तो उसके पास काफ़ी कम अंतर का बहुमत होगा. इसके अलावा गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल के अलावा समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएँ हैं. तो स्थिर सरकार कैसे देंगे?
यूपीए की बैठक में फ़ैसला किया गया है कि समन्वय समिति बनाई जाए. झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष और केंद्रीय कोयला मंत्री शिबु सोरेन इसके चेयरमैन होंगे. सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को समन्वय समिति के सामने लाया जाएगा और सामूहिक निर्णय लिए जाएँगे.
जहाँ तक एक निर्दलीय को मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन देने की बात है तो यह सबके मन में क्षेत्र के लिए कुछ अच्छा करने की सोच का परिणाम है.
आपने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बग़ावत की थी और पिछली सरकार को कटघरे में खड़ा किया था. अब आप भ्रष्टाचार से कैसे निपटेंगे?
भ्रष्टाचार को ख़त्म करना हो या विकास के काम को आगे बढ़ाना हो, सिर्फ़ बोलने से कुछ नहीं होगा. इसके लिए इच्छशक्ति होनी चाहिए. निश्चित रूप से यह बहुत बड़ी समस्या है. स्थिति क़ाफी भयावह हो चुकी है लेकिन हम इसकी जड़ें तलाश कर इसे ख़त्म करेंगे. मैं बहुत ज्यादा बातों में विश्वास नहीं करता. बहुत जल्द आपको काम करके दिखाऊंगा.