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गुरुवार, 14 सितंबर, 2006 को 07:02 GMT तक के समाचार

मुंडा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया

झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंप दिया है.

दूसरी ओर, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) ने सरकार बनाने की कोशिशें तेज़ कर दी है.

चार मंत्रियों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार अल्पमत में आ गई थी.

यूपीए खेमे के तीन विधायकों की सदस्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया जिसके बाद अर्जुन मुंडा के लिए बहुमत साबित करना मुश्किल हो गया.

गुरुवार को जैसे ही नामधारी ने कहा कि तीनों विधायक विश्वास मत पर मतदान कर सकते हैं, उसके थोड़ी देर बाद ही मुख्यमंत्री ने विधानसभा में इस्तीफ़ा देने की घोषणा कर दी.

इस्तीफ़ा

अर्जुन मुंडा ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा, "राज्य की जनता ने वर्ष 2005 में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड गठबंधन में विश्वास जताया था. हमने जनता की सेवा करने की कोशिश की."

उन्होंने कहा कि "राज्य सरकार के काम को देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया."

मुख्यमंत्री ने कहा,"मौजूदा परिस्थिति में मैं इस्तीफ़ा देना ही बेहतर ही समझता हूँ इसलिए मैं राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा सौंप दूँगा."

यूपीए की कवायद

मुंडा के इस्तीफ़ा देने की घोषणा के बाद विपक्षी यूपीए खेमे में सरकार बनाने की कोशिशें तेज हो गई.

इसके लिए राँची के होटल अशोक में यूपीए विधायकों की बैठक हो रही है. इसमें राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय और झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन भी शामिल हैं.

विधानसभा में विपक्ष के नेता सुधीर महतो ने बीबीसी को बताया कि यूपीए अब औपचारिक रुप से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करेगी और ज़ल्दी ही राज्यपाल से मिल कर सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा.

दूसरी ओर यूपीए के अन्य घटक दल राष्ट्रीय जनता दल के नेता गिरिनाथ सिंह ने बीबीसी को बताया कि मुंडा के ख़िलाफ़ विद्रोह का बिगुल बजाने वाले निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा ही मुख्यमंत्री होंगे.

नामधारी का फ़ैसला

इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नामधारी ने तीनों विधायकों-एनोस एक्का, कमलेश सिंह और स्टीफन मरांडी-की सदस्यता पर फ़ैसला सुरक्षित करते हुए कहा, "यह मामला काफ़ी पेचीदा है. इस पर और अध्ययन की आवश्यकता है इसलिए हमने फ़ैसला सुरक्षित रखा है."

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर विश्वास मत प्रस्ताव पर मतविभाजन होता है तो विपक्षी यूपीए खेमे के तीनों विधायक मत डालने के योग्य होंगे.

नामधारी ने बताया कि सरकार गिरने के बावजूद इन विधायकों का मामला लंबित रहेगा और आगे इस पर फ़ैसला किया जाएगा.

समीकरण

82 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए कम से कम 42 विधायकों का समर्थन होना ज़रुरी है.

वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए को 43 विधायकों का समर्थन मिला था लेकिन चार मंत्रियों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद यह संख्या घट कर 39 रह गई थी.

इसमें विधानसभा अध्यक्ष नामधारी और एक मनोनीत एंग्लो इंडियन सदस्य जे. गेलस्टोन शामिल हैं.

झारखंड विधानसभा में मनोनीत सदस्य को भी विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान करने का अधिकार मिला हुआ है.

दूसरी ओर, एनोस एक्का, मधु कोड़ा, हरिनारायण सिंह और कमलेश सिंह के यूपीए के पाले में आने के बाद उनके समर्थन में 43 विधायक हो गए हैं.