गुरुवार, 14 सितंबर, 2006 को 04:49 GMT तक के समाचार
झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने तीन विधायकों की सदस्यता के मसले पर फ़ैसला सुरक्षित रखा है. उन्होंने कहा कि वे विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान कर सकते हैं.
बदली परिस्थिति में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के लिए सरकार बचाना मुश्किल हो गया है.
यह पूछे जाने पर कि क्या अब भी वे विधानसभा में विश्वास मत पेश करेंगे या इस्तीफ़ा दे देंगे, मुख्यमंत्री ने कहा, "देखिए अभी मैं इस पर विचार कर रहा हूँ. मैं विधानसभा में ही हूँ और क्या फ़ैसला करना है इसके बारे में बाद में बता पाऊँगा."
नामधारी ने तीनों विधायकों-एनोस एक्का, कमलेश सिंह और स्टीफन मरांडी-की सदस्यता पर फ़ैसला सुरक्षित करते हुए कहा, "यह मामला काफ़ी पेचीदा है. इस पर और अध्ययन की आवश्यकता है. इसलिए हमने फ़ैसला सुरक्षित रखा है."
उन्होंने साफ किया कि अगर विश्वास मत प्रस्ताव पर मतविभाजन होता है तो विपक्षी यूपीए खेमे के तीनों विधायक मत डालने के योग्य होंगे.
इसके साथ ही मुंडा सरकार का अस्तित्व संकट में पड़ गया है. खुद नामधारी ने इस ओर संकेत किया. यह पूछने पर कि उनके ख़िलाफ़ भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस है तो उन्होंने कहा, "अब अगले दो दिनों मैं खुद रहूँगा (पद पर) या नहीं यही पता नहीं है."
इस बीच यूपीए के घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने व्हिप जारी कर अपने विधायकों को विश्वास मत के ख़िलाफ़ मतदान करने को कहा है.
सत्तारुढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विधायक विधानसभा पहुँच चुके हैं.
राज्य सरकार के चार बाग़ी मंत्रियों के पाला बदल कर विपक्षी यूपीए खेमे में आ जाने के बाद मुंडा सरकार अल्पमत में है. हालाँकि मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बहुमत साबित कर देने का दावा करते रहे हैं.
इस बीच विधानसभा की कार्यवाही सुचारु रुप से चले इसके लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं.
विधानसभा परिसर में झारखंड पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बलों और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है.
राजधानी राँची में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और पूरे शहर की नाकेबंदी कर दी गई है. पुलिस के जवान लगातार गश्त लगा रहे हैं.
समीकरण
82 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 43 विधायकों का समर्थन मिला था लेकिन चार मंत्रियों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद यह संख्या घट कर 39 रह गई है.
इसमें विधानसभा अध्यक्ष नामधारी और एक मनोनीत एंग्लो इंडियन सदस्य जे. गेलस्टोन शामिल हैं.
झारखंड विधानसभा में मनोनीत सदस्य को भी विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान करने का अधिकार मिला हुआ है.
दूसरी ओर विपक्षी यूपीए विधायकों की संख्या राजनैतिक संकट से पूर्व 39 थी लेकिन एनडीए से हटने वाले विधायकों के समर्थन के बूते अब वह 43 विधायकों के साथ बहुमत का दावा कर रही है.