मंगलवार, 12 सितंबर, 2006 को 16:46 GMT तक के समाचार
एक अमरीकी मानवाधिकार संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय सेना की हिरासत में कई 'चरमपंथियों' की मौत हुई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे भारतीय सेना के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं.
मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने ये बातें भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति के अध्ययन पर आधारित अपनी एक रिपोर्ट में कही हैं.
संस्था के एशिया निदेशक ब्रैड एडम्स ने 156 पन्नों की इस रिपोर्ट के जारी करते हुए कहा, "पुलिस और सेना के अधिकारियों ने हमारी संस्था को बताया है कि कुछ मामलों में चरमपंथियों को अदालत के सामने पेश करने के बजाय मार दिया गया है और ऐसा सुरक्षा के ख़तरों को ध्यान में रखते हुए किया गया है."
उन्होंने बताया, "इन मारे गए लोगों की मौत के पीछे सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच मुठभेड़ जैसे झूठे तर्क दिए जाते हैं."
हालांकि उन्होंने स्वीकारा कि राज्य में पिछले दो वर्षों में मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार आया है पर इसके बावजूद स्थिति चिंताजनक है.
उन्होंने कहा कि यह तकलीफ़देह है कि भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में एक मज़बूत क़ानून व्यवस्था के होते हुए भी मानवाधिकारों का हनन करने वाले सुरक्षाकर्मियों को बचाया जाता है.
संस्था की यह रिपोर्ट राज्य में चरमपंथियों की गतिविधियों की आलोचना करते हुए कहती है कि राज्य में आम लोगों के ऊपर होने वाले चरमपंथी हमलों ग़लत हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में इन चरमपंथी संगठनों के प्रति पिछले कुछ समय में लोकप्रियता कम हुई है पर लोग इनके डर की वजह से खुलकर कुछ नहीं बोलते हैं.
सफ़ाई
उधर भारतीय सेना के अधिकारियों ने भी इस बात को स्वीकारा है कि इस तरह के मामले हाल के कुछ वर्षों में देखने को मिले हैं.
दिल्ली में भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल सखूजा ने बीबीसी को बताया, "पिछले कुछ समय में फर्जी मुठभेड़ों के कुछ मामले सामने आए हैं और हमने इन मामलों में कार्रवाई भी की है."
हालांकि उन्होंने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि जबतक हम इस पूरी रिपोर्ट को देख नहीं लेते तबतक इस बारे में कुछ भी कहना हमारे लिए ठीक नहीं होगा.