मंगलवार, 12 सितंबर, 2006 को 08:29 GMT तक के समाचार
मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार धमाकों के मामले में टाडा अदालत ने अपने पहले फ़ैसले में मेमन परिवार के चार सदस्यों को दोषी करार दिया है जबकि इसी परिवार के तीन सदस्यों को बरी कर दिया गया है.
दोषी करार दिए गए लोगों को बाद में सज़ा सुनाई जाएगी.
अदालत ने कहा है कि कि अभियुक्तों की बड़ी संख्या को देखते हुए उन्हें आठ-आठ के समूह में बाँट कर बारी-बारी से फ़ैसला सुनाया जाएगा.
मंगलवार को टाडा अदालत ने मेमन परिवार के चार लोगों को बम धमाकों में शामिल होने का दोषी पाया. इनके नाम हैं, याकूब मेमन, ईसा मेमन, युसुफ़ मेमन और रूबीना मेमन.
जिन लोगों को बरी कर दिया गया वे हैं, सुलेमान मेमन, हनीफ़ा मेमन और राहिला मेमन.
याकूब का बड़ा भाई और धमाकों का मुख्य अभियुक्त टाइगर मेमन फ़रार है जबकि इसी परिवार के एक सदस्य अब्दुल रज्ज़ाक की मौत हो चुकी है.
मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और बॉलीवुड स्टार संजय दत्त को भी अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार है.
फ़ैसले के बाद सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने अदालत से धमाकों में सीधे तौर पर शामिल व्यक्तियों को सबसे पहले सज़ा सुनाने का अनुरोध किया है.
इस मामले के 123 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एक दशक से अधिक समय तक सुनवाई चली.
ग़ौरतलब है कि मुंबई में 12 मार्च, 1993 को सिलसिलेवार रूप से हुए 12 बम धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे.
अदालती प्रक्रिया
यह मामला भारतीय क़ानूनी इतिहास के अत्यंत पेचीदा और लंबे मामलों में से एक माना जाता है.
इस मामले में एक दशक से अधिक समय तक सुनवाई चली और 686 गवाह पेश हुए और क़रीब दस हज़ार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई.
इस मामले में अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार न केवल अभियुक्तों को है बल्कि मामले की जांच करने वाली विशेष टास्क फोर्स, सीबीआई और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को भी है.