मंगलवार, 12 सितंबर, 2006 को 13:41 GMT तक के समाचार
नैटो की ज़मीनी सेना के अंतरराष्ट्रीय कमांडर का कहना है कि पिछले एक साल में अफ़ग़ानिस्तान में अतिरिक्त सैनिक भेजने के अनुरोध को नैटो देश मानने में विफल रहे हैं.
लेफ़्टिनेंट जनरल डेविड रिचर्डस ने फ़ाइनेंशियल टाइम्स को बताया है कि नैटो गठबंधन पिछले 18 महीनों से एक हज़ार रिज़र्व सैनिकों की माँग करता रहा है.
पिछले हफ़्ते नैटो ने 2500 सैनिक अफ़ग़ानिस्तान भेजने का अनुरोध किया था.
नैटो गठबंधन के महासचिव जाप डी हूप ने बीबीसी को बताया, "हमें उम्मीद है कि नैटो देश जल्द ही हम से किए वादों को पूरा करेंगे."
गौरतलब है कि नैटो अफ़ग़ानिस्तान में आईएसएएफ़ यानि इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड असिसटेंस फ़ोर्स का नेतृत्व कर रहा है.
आईएसएएफ़ के अंतगर्त 37 देशों के लगभग 18,500 सैनिक तैनात हैं.
'पूरी नहीं हुई माँगें'
काबुल से बीबीसी संवाददाता एलीस्टर लीथहैड का कहना है कि दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में नैटो और तालेबान लड़ाको के बीच संघर्ष तेज़ होता जा रहा है.
नैटो के मुख्य कमांडर जनरल जेम्स जोंस ने पिछले सप्ताह 2,500 अतिरिक्त सैनिकों की माँग की थी.
इसमें 1000 रिज़र्व सैनिक और 1500 सैनिक वायुसेना की मदद के लिए थे.
जनरल जेम्स जोंस ने कहा कि ये अतिरिक्त सैनिक वही हैं जिनकी ज़रूरत 18 महीने पहले थी.
नैटो गठबंधन देशों के राजदूतों से मिलने के बाद महासचिव डी हूप ने बीबीसी रेडियो को बताया कि वे अफ़ग़ानिस्तान में और फ़ौज भेजे जाने के लिए 'काफ़ी कोशिश' कर रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में और अधिक सैनिक भेजने को लेकर नैटो अधिकारियों ने बुधवार को बेल्जियम में कॉंफ़्रेस आयोजित की है.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक कंधार और हेलमंद में संघर्ष लगातार तेज़ हो रहा है और नैटो कमांडरों ने स्वीकार किया है कि उन्हें और सैनिक और हवाईजहाज़ों की ज़रूरत है.
संवाददाता का कहना है कि इस बात पर सहमत होने के बावजूद कि अतिरिक्त संसाधनों की ज़रूरत है, नैटो देश अफ़ग़ानिस्तान के खतरनाक इलाक़े में अपने सैनिक भेजने को पूरी तरह राज़ी नज़र नहीं आते.
संवाददाता का कहना है कि कई मामलों में तो ये देश अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षित इलाक़े से दक्षिणी इलाक़ों में सैनिक भेजने के लिए भी तैयार नहीं होते.